Wednesday, September 16, 2026
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बलदा पहाड़ियों में ड्रोन सर्वे का ग्रामीणों ने किया विरोध, अदाणी समूह की टीम को रोका

ओडिशा: नंदपुर ब्लॉक की बलदा पहाड़ियों में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार को बलदा पहाड़ी क्षेत्र में कथित ड्रोन सर्वे करने पहुंची टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सर्वे टीम के सदस्यों को रोक लिया। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने अदाणी समूह के प्रतिनिधि दिलीप परिच्छा और प्रमोद हियाल समेत अन्य कर्मचारियों को भी कुछ समय तक रोके रखा। स्थिति की जानकारी मिलने के बाद पाडुआ पुलिस मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप कर सर्वे टीम के लोगों को बाहर निकाला। पुलिस ने ग्रामीणों द्वारा रोके गए ड्रोन और वाहनों को जब्त कर लिया।

ड्रोन सर्वे को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

बलदा पहाड़ी संरक्षण समिति की ओर से पाडुआ थाने में शिकायत भी दी गई है। समिति ने सर्वे को कथित तौर पर अवैध बताते हुए इसकी अनुमति और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। समिति अध्यक्ष अजय मुदुली और बिजय कुमार के नेतृत्व में चिलम, कंतासारू, खड़ापुट, कंधागुड़ा, तैनतार और बलदा समेत कई गांवों के ग्रामीण मौके पर पहुंचे थे। ग्रामीणों का सवाल है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ड्रोन सर्वे किसकी अनुमति से किया जा रहा था और सर्वे से पहले ग्रामसभा को इसकी जानकारी दी गई थी या नहीं।

बॉक्साइट खनन को लेकर पहले से विरोध

बलदा पहाड़ियों में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन को लेकर स्थानीय ग्रामीण पहले से विरोध जताते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रस्तावित खनन से संबंधित ग्रामसभा और जनसुनवाई को लेकर भी आपत्ति जता रहे हैं। बलदा, भेजा, बादेल, अटांडा और कुलबीर पंचायतों के ग्रामीणों की ओर से स्थानीय जमीन, जंगल, पहाड़ और सामुदायिक संसाधनों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

पेसा और पांचवीं अनुसूची को लेकर भी सवाल

ड्रोन सर्वे के बाद ग्रामीणों ने पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि सर्वे के लिए किस विभाग या प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी और ड्रोन के जरिए किस तरह का डेटा जुटाया जा रहा था।साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि इस सर्वे का प्रस्तावित बॉक्साइट खनन से क्या संबंध है।

कंपनी की गतिविधियों को लेकर पहले भी विरोध

बलदा पहाड़ी संरक्षण समिति का आरोप है कि CSR गतिविधियों के नाम पर कंपनी के अधिकारी लगातार गांवों में पहुंच रहे हैं। समिति का आरोप है कि इससे ग्रामीणों के बीच असंतोष बढ़ रहा है।कुछ दिन पहले बलदा में अदाणी की मोबाइल स्वास्थ्य सेवा के वाहन का भी ग्रामीणों ने विरोध किया था।

खनन और स्थानीय समुदाय के बीच बढ़ता विवाद

स्थानीय जानकारी के मुताबिक, बलदा की पहाड़ियों और गुफाओं को वर्ष 2008 में पर्यावरण पर्यटन स्थल के तौर पर मान्यता मिली थी। बाद में इस क्षेत्र को खनन के लिए चिह्नित किया गया और नीलामी प्रक्रिया के जरिए अदाणी समूह को यहां खनन अधिकार मिलने की बात सामने आई। फिलहाल ड्रोन सर्वे को लेकर हुए विवाद के बाद स्थानीय स्तर पर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ग्रामीणों की मांग है कि खनन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में ग्रामसभा और स्थानीय समुदाय की भूमिका तथा लागू कानूनी प्रावधानों को स्पष्ट किया जाए। वहीं, सर्वे की अनुमति और पूरी प्रक्रिया को लेकर संबंधित प्रशासन एवं कंपनी की ओर से आधिकारिक स्थिति सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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