राज्यसभा की एक सीट पर सस्पेंस; पार्टी नेताओं के खुले समर्थन के बीच सियासी पारी की अटकलें तेज
Highlights
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नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की चर्चा तेज
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जदयू नेताओं ने सार्वजनिक रूप से स्वागत के संकेत दिए
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बिहार से राज्यसभा की 5 सीटें खाली, जदयू के खाते में 2 सीटें
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एक सीट पर रामनाथ ठाकुर लगभग तय, दूसरी पर सस्पेंस
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विधान परिषद का रास्ता भी विकल्प के तौर पर खुला
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अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ में

विस्तार
बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने की अटकलें अब महज़ कयास नहीं रह गई हैं, बल्कि इन्हें लेकर पार्टी के भीतर खुलकर बयानबाज़ी भी शुरू हो गई है। जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि यदि निशांत राजनीति में कदम रखते हैं तो पार्टी उनका स्वागत करेगी। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि उनकी एंट्री को लेकर शीर्ष स्तर पर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही कोई औपचारिक घोषणा हो सकती है।
राज्यसभा चुनाव ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं और एनडीए गठबंधन अपनी रणनीति बनाने में जुटा है। जदयू के खाते में दो सीटें मानी जा रही हैं। एक सीट पर रामनाथ ठाकुर की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। इसी सीट के संदर्भ में निशांत कुमार का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। यदि उन्हें राज्यसभा भेजा जाता है तो यह उनकी सियासी पारी की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी।
हालांकि संभावना सिर्फ राज्यसभा तक सीमित नहीं है। यदि पार्टी चाहे तो उन्हें विधान परिषद के रास्ते भी राजनीति में लाया जा सकता है। जून में विधान परिषद की कई सीटें खाली होने वाली हैं, जिससे यह विकल्प भी खुला है। इससे उन्हें सीधे जनता की राजनीति में उतरने से पहले संगठन और प्रशासनिक अनुभव लेने का अवसर मिल सकता है।
पार्टी के भीतर समर्थन की आवाज़ें भी लगातार तेज हो रही हैं। मंत्री विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार और अशोक चौधरी जैसे नेताओं ने कहा है कि कार्यकर्ताओं की लंबे समय से इच्छा रही है कि निशांत सक्रिय भूमिका निभाएं। श्रवण कुमार ने तो हाल ही में संकेत दिया कि उनकी एंट्री “बहुत जल्द” हो सकती है। वहीं अशोक चौधरी ने उन्हें पढ़ा-लिखा और सक्षम बताते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार की कार्यशैली की झलक पेश कर सकते हैं।
दूसरी ओर, राज्यसभा चुनाव का गणित भी दिलचस्प है। 243 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 41 वोट आवश्यक हैं। जदयू और भाजपा के संयुक्त आंकड़े एनडीए को चार सीटों के लिए मजबूत स्थिति में रखते हैं, जबकि पांचवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में सहयोगी दलों की दावेदारी और अंदरूनी संतुलन भी अहम भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल अंतिम निर्णय नीतीश कुमार को ही लेना है। वर्षों तक परिवारवाद से दूरी बनाए रखने की उनकी छवि रही है, इसलिए यह फैसला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या निशांत कुमार की सियासी एंट्री राज्यसभा से होगी या वे सीधे बिहार की जमीनी राजनीति में उतरेंगे। आने वाले कुछ दिन इस सस्पेंस से पर्दा हटा सकते हैं।
