Thursday, February 26, 2026
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खालसा पंथ का 325 वां स्थापना मनाया गया धूमधाम से

खालसा मेरो रूप है खास, खालसे मैं हूं करो निवास…

वैशाखी को लेकर गुरूद्वारा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

शब्द कीर्तन और लंगर का आयोजन, सदर विधायक समेत कई गणमान्य लोगों ने लिया हिस्सा

गिरिडीह : वैशाखी  पर्व को लेकर स्टेशन रोड स्थित गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में शनिवार को भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान गुरूद्वारा को आकर्षक रूप से सजाया गया था।  मौके पर गुरू ग्रंथ साहिब को बहुत ही अच्छे ढंग से सजाया गया था। इस दौरान देहरादून के भाई हरप्रीत सिंह और उनकी टीम के द्वारा  कई शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया।  जिसे सुनकर सात संगत निहाल हो गई। खालसा पंथ के 325 वें स्थापना दिवस को लेकर गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में 11 अप्रैल से अखंड पाठ का आयोजन किया गया था। जिसका समापन आज हुआ। इस संबंध में जानकारी देते हुए गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा के प्रधान डॉ गुणवंत सिंह मोंगिया  ने बताया कि आज के दिन ही 13 अप्रैल 1699 ई0 में आनन्दपुर साहेब में खालसा पंथ की स्थापना दसमेश गुरू,  गुरू गोबिंद सिंह जी महाराज ने की थी।

आज के दिन उन्होंने लोगों के बीच अमृत का संचार किया था। कहा कि इस दिन को हमलोग बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं। वैशाखी को हमलोग खालसा सिरजना दिवस के रूप में मनाते है। कहा कि पंजाब में इसे काफी ही धूमधाम  से मनाया जाता है। आज के दिन ही हमारा नया वर्ष शुरू होता है। उन्होंने कहा कि सिखों का जो स्वरूप है वह आज के दिन ही हम लोगों को मिला था। इस दौरान गुरूद्वारे में भव्य लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सिख समाज के अलावे अन्य समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान गुरुद्वारे में पहुंचे गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू को गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान के द्वारा शिरोपा देकर सम्मानित किया गया। लंगर की सेवा हर साल की तरह इस साल भी समाजसेवी रतन गुप्ता जी के द्वारा की गई थी। गुरूद्वारा प्रबंधन कमिटी के प्रधान डाॅ मोंगिया के द्वारा श्री गुप्ता को भी सिरोपा देकर सम्मानित किया। मौके पर गुरूद्वारा गुरूसिंह सभा के सचिव नरेंद्र सिंह सलूजा उर्फ सम्मी, चरणजीत सिंह सलूजा, अमरजीत सिंह सलूजा, कुवंरजीत सिंह सलूजा, मंजीत सिंह, गुरविंदर सिंह सलूजा, गुरदीप सिंह बग्गा, परमजीत सिंह कालू, ऋषि सिंह, राजेंद्र सिंह बग्गा, राजू चावला, हरमिंदर सिंह बग्गा, गोल्डी सिंह समेत काफी संख्या में समाज के महिला-पुरूष व बच्चे मौजूद थे।

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