Thursday, September 3, 2026
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चतरा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का भव्य अनावरण

आदिवासी अस्मिता, पहचान और आंदोलन की गूंज से गूंजा सदर प्रखंड परिसर

झारखंड आंदोलन की आत्मा को मिला नया स्वरूपचतरा में दिशोम गुरु की प्रतिमा का ऐतिहासिक अनावरण

Highlights

  • चतरा सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण
  • हजारों लोगों की मौजूदगी, आदिवासी एकता मंच द्वारा आयोजन
  • धीरज प्रसाद साहू ने किया अनावरण, कई विधायक और पूर्व मंत्री रहे उपस्थित
  • जल–जंगल–जमीन के संघर्ष और आदिवासी अस्मिता पर नेताओं का जोर
  • “दिशोम गुरु अमर रहें” के नारों से गुंजा पूरा परिसर

चतरा सदर प्रखंड कार्यालय परिसर रविवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य का गवाह बना, जब झारखंड आंदोलन के अग्रदूत, संघर्ष के प्रतीक और हजारों आदिवासियों की आवाज रहे स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया।

आदिवासी एकता मंच द्वारा आयोजित इस समारोह में चतरा और आसपास के प्रखंडों से हजारों लोग पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक जोश के साथ पहुंचे। पूरा परिसर “झारखंडी स्वाभिमान” के नारों से गूंजता रहा।

पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू ने किया अनावरण

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने प्रतिमा का अनावरण कर किया। क्षण भर के लिए पूरा परिसर भावनाओं, गर्व और संघर्ष की स्मृतियों से भर उठा।

नेताओं ने कहा दिशोम गुरु का संघर्ष झारखंड की आत्मा

मंच पर मौजूद कई प्रमुख नेताओं ने दिशोम गुरु के योगदान को झारखंड की नियति बदलने वाला बताया—

  • डॉ. रामेश्वर उरांव, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं लोहरदगा विधायक
  • रामचंद्र सिंह चेरो, मनिका विधायक
  • नमन विकस्ल कोनगाड़ी, कोलेबिरा विधायक
  • सोनाराम सिंकु, जगन्नाथपुर विधायक

सभी ने एक सुर में कहा: शिबू सोरेन सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि झारखंड के जलजंगलजमीन की आत्मा हैं। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शक है।

जनभावनाओं से जुड़ा ऐतिहासिक निर्णय

स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रतिमा स्थापना जनता के सम्मान, आदिवासी स्वाभिमान और आंदोलनकारी विरासत का प्रतीक है।
यह निर्णय—

  • जनता की मजबूत इच्छाशक्ति
  • सामाजिक एकता
  • और संगठनात्मक प्रतिबद्धता

का जीवंत उदाहरण है।

सबकी विशेष भागीदारी ग्रामीण, युवा, महिलाएँ, बुद्धिजीवी

समारोह में

  • ग्रामीणों
  • छात्र–छात्राओं
  • युवाओं
  • सामाजिक कार्यकर्ताओं
  • महिलाओं
  • और स्थानीय बुद्धिजीवियों

की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी कलाकारों ने पारंपरिक नगाड़ों और मांदर की थाप पर माहौल को पूरी तरह झारखंडी रंग में रंग दिया।

गूंजते रहे संघर्ष और गौरव के नारे पूरे कार्यक्रम के दौरान ये नारे लगातार आसमान में गूंजते रहे

बिरसा मुंडा अमर रहें!

नीलांबरपीतांबर अमर रहें!

दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें!

इन नारों ने झारखंड की पहचान, संघर्ष और स्वाभिमान की विरासत को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।

समापन

चतरा में दिशोम गुरु की प्रतिमा स्थापना सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की ऐतिहासिक चेतना को पुनर्जीवित करने वाला क्षण बन गया।
यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाती रहेगी कि—संघर्ष ही झारखंड की रीढ़ है, और दिशोम गुरु उसकी आत्मा।

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