Thursday, August 27, 2026
Homeखबर स्तम्भनेपाल में जल प्रलय: 157 की मौत, 750 लापता; 133 भारतीयों का...

नेपाल में जल प्रलय: 157 की मौत, 750 लापता; 133 भारतीयों का भी पता नहीं

काठमांडू: नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिकों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन तबाही इतनी व्यापक है कि कई परिवारों ने आपदा की पहली रात मलबे के बीच अपने अपनों की तलाश में गुजारी। बताया जा रहा है कि भोटे कोशी नदी और उससे जुड़े इलाके में अचानक आए तेज सैलाब ने घरों, वाहनों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल के रसुवा समेत तीन जिलों में इस आपदा का सबसे ज्यादा असर देखा गया है।

बिना बारिश के अचानक आया सैलाब

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रभावित इलाकों में उस समय बारिश नहीं हो रही थी। ऐसे में लोगों को बाढ़ आने की कोई चेतावनी नहीं मिली और संभलने का मौका तक नहीं मिल सका। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चीन सीमा के करीब ल्हेंडे नदी के रास्ते में भूस्खलन और बर्फीले मलबे के कारण अवरोध पैदा हुआ। इसके बाद पानी के तेज बहाव ने निचले इलाकों की ओर तबाही मचा दी। रसुवागढ़ी के पास तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और आसपास की बस्तियां इसकी चपेट में आ गईं।

विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी लापता

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, लापता लोगों की संख्या काफी अधिक है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 391 विदेशी नागरिक और 44 सुरक्षाकर्मियों का भी पता नहीं चल पाया है। आपदा के बाद राहतकर्मी मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। आशंका जताई जा रही है कि जैसे-जैसे राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों की संख्या में इजाफा हो सकता है।

सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह

बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती आकलन के अनुसार 9 जलविद्युत परियोजनाएं और बैंकों की 9 शाखाएं पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क बाढ़ की चपेट में आ गई।

भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

नेपाल में मची तबाही के बीच भारत ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, भारत की मानवीय सहायता, आपदा राहत सामग्री और मेडिकल सहायता काठमांडू पहुंच चुकी है। भारत ने नेपाल के लिए 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। भारतीय वायुसेना के C-130J विमान के जरिए भेजी गई सामग्री में अस्थायी टेंट, कंबल, साफ-सफाई का सामान, सोलर लैंप और जरूरी दवाएं शामिल हैं।

अब भी बना हुआ है बड़ा खतरा

नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विभाग तथा आपदा प्रबंधन एजेंसियां बाढ़ की वजहों की जांच कर रही हैं। शुरुआती आकलन में बर्फीले भूस्खलन, नदी में बने अवरोध और उसके बाद अचानक पानी के तेज बहाव को इस आपदा की संभावित वजह माना जा रहा है। फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। लेकिन 157 मौतों, सैकड़ों लोगों के लापता होने और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के नुकसान ने इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में शामिल कर दिया है। अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों तक पहुंचना, प्रभावित परिवारों को राहत देना और आगे संभावित बाढ़ के खतरे से लोगों को सुरक्षित निकालना है।

RELATED ARTICLES

Most Popular