Monday, August 24, 2026
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JPSC परीक्षा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, झारखंड सरकार और आयोग को नोटिस

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दाखिल की गई है।

CBI जांच की मांग, सिर्फ परीक्षा रद्द करना काफी नहीं

याचिकाकर्ता की ओर से JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है। दलील दी गई कि केवल परीक्षा रद्द कर देना कथित अनियमितताओं की जांच का विकल्प नहीं हो सकता। याचिका में मांग की गई है कि मामले की जांच CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की तह तक पहुंचा जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।

अहम रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी मांग

याचिका में परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इनमें मूल OMR शीट, अभ्यर्थियों के पास उपलब्ध कार्बन कॉपी, CCTV फुटेज, सर्वर ऑडिट लॉग और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी भी विस्तृत जांच से पहले इन साक्ष्यों को संरक्षित किया जाना जरूरी है, ताकि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच संभव हो सके।

TSDPL की नियुक्ति पर भी उठे सवाल

याचिका में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TSDPL की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने एजेंसी के चयन की प्रक्रिया और उससे जुड़े कथित विवादों की जांच कराने की मांग की है। याचिका में यह आशंका भी जताई गई है कि मामले के तार राज्य के बाहर तक जुड़े हो सकते हैं। इसी आधार पर जांच के दायरे और राज्य की एजेंसियों की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

छात्रों का आंदोलन और भर्ती व्यवस्था पर सवाल

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से जारी रहा है। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में जिस मामले पर नोटिस जारी किया गया है, वह मौजूदा याचिका के तहत JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से संबंधित है। इसे सीधे JSSC-CGL या अन्य भर्ती परीक्षाओं से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

अब सरकार और JPSC के जवाब पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब झारखंड सरकार और JPSC को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट आगे क्या रुख अपनाता है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई ने JPSC परीक्षा विवाद को नया मोड़ दे दिया है और अब छात्रों, अभ्यर्थियों तथा राजनीतिक दलों की नजर मामले की अगली सुनवाई पर टिकी है।

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