उपराष्ट्रपति चुनाव: सत्ता का समीकरण, कौन मारेगा बाजी? NDA के C.P. राधाकृष्णन और विपक्ष के B. सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 – अब तक की बड़ी बातें
- लोकसभा + राज्यसभा = 782 सांसद, बहुमत के लिए 392 वोट जरूरी।
- एनडीए के पास 427 का समर्थन, विपक्ष के पास 355 सांसद।
- 133 सांसद फिलहाल किसी खेमे में नहीं – यही बनेंगे किंगमेकर।
- एनडीए उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
- वोटिंग सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, गिनती के बाद होगा ऐलान।
विस्तार
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद आज 17वें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे हैं। इस मुकाबले में एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और विपक्षी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी आमने-सामने हैं। इस चुनाव में एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है, लेकिन विपक्ष को अभी भी क्रॉस वोटिंग की उम्मीद है।
वर्तमान में लोकसभा में 542 और राज्यसभा में 240 सांसद हैं, जिससे संसद में कुल 782 सदस्य हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए बहुमत का आंकड़ा 392 मत है। संख्या बल की बात करें तो एनडीए के पास 427 सदस्यों का सीधा समर्थन है, जिसमें लोकसभा के 293 और राज्यसभा के 134 सदस्य शामिल हैं। वहीं, विपक्ष की ओर देखें तो उनके पास लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर 355 सांसद हैं। हालांकि, अभी भी 133 सांसद ऐसे हैं जो किसी भी पक्ष में खुलकर सामने नहीं आए हैं।
यही वे सांसद हैं, जिन्हें अपनी ओर खींचने की विपक्ष कोशिश कर सकता है। इन्हीं सांसदों की वजह से विपक्षी उम्मीदवार भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। विपक्ष को बहुमत पाने के लिए सिर्फ 37 और सांसदों की जरूरत है, और उन्हें उम्मीद है कि यह अंतर उन 133 सांसदों में से पूरा किया जा सकता है। फिर भी, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए का पलड़ा भारी है, और सी.पी. राधाकृष्णन का 17वां उपराष्ट्रपति बनना लगभग तय है।
उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी अहम जानकारी
वोटिंग प्रक्रिया:
उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान एकल संक्रमणीय आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Single Transferable Vote) के तहत गुप्त रूप से होता है। सांसद उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी वरीयता (1, 2, 3…) दर्ज करते हैं।
मतों की गिनती:
सबसे पहले वैध मतों में पहली वरीयता के वोटों को गिना जाता है। अगर किसी उम्मीदवार को 50% से अधिक वोट मिल जाते हैं, तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को हटाकर उसके वोट अगली प्राथमिकता के आधार पर अन्य उम्मीदवारों को हस्तांतरित कर दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक किसी एक उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिल जाता।
निर्वाचक मंडल:
उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें दोनों सदनों के सदस्य शामिल होते हैं। इसमें राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य शामिल हैं। इस तरह निर्वाचक मंडल में कुल 788 सदस्य होते हैं।
BJD और BRS ने बनाई दूरी, NDA को फायदा
इस चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) और तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने चुनाव से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। बीजेडी ने इसे एनडीए और इंडिया दोनों से ‘समान दूरी बनाए रखने’ की अपनी नीति बताया है। राज्यसभा में बीजेडी के 7 और बीआरएस के 4 सांसद हैं।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने माना है कि बीजेडी और बीआरएस का यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन को फायदा पहुंचाएगा। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा का समर्थन बताया है, जबकि भाजपा ने इसे नवीन पटनायक का ‘अप्रत्यक्ष समर्थन’ माना है।
शिंदे की शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे ने दावा किया है कि एनडीए उम्मीदवार को कुल सदस्यों की संख्या से भी ज्यादा वोट मिलेंगे, जिससे जीत का अंतर और भी बड़ा हो सकता है।
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
बीजेपी नेता जुएल ओराम ने कहा – “बीजेडी का यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से एनडीए उम्मीदवार का समर्थन है।”
कांग्रेस नेता भक्त चरण दास ने आरोप लगाया – “मतदान से दूर रहना मतलब बीजेपी का समर्थन करना है।
शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे बोले – “आप देखेंगे कि एनडीए के पास घोषित समर्थन से भी ज्यादा वोट आएंगे।”
धार्मिक आस्था भी दिखी
वोटिंग से पहले एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन लोधी रोड स्थित श्री राम मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की।
