Sunday, May 31, 2026
Homeखबर स्तम्भसी.पी. राधाकृष्णन बने भारत के नए उपराष्ट्रपति, 452 वोटों से जीत दर्ज

सी.पी. राधाकृष्णन बने भारत के नए उपराष्ट्रपति, 452 वोटों से जीत दर्ज

नई दिल्ली- मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को मात देकर जीत दर्ज की। राधाकृष्णन को 452 प्रथम वरीयता के वोट मिले, जबकि रेड्डी को केवल 300 वोट मिले। निर्वाचन अधिकारी पी.सी. मोदी ने परिणाम की घोषणा करते हुए बताया कि यह जीत पूरी तरह एकतरफा रही।

चुनावी आंकड़े

कुल सांसद: 781 (रिक्त सीटों को छोड़कर)
कुल मतदान: 769 सांसदों ने वोट डाला (98% मतदान)
वैध वोट: 752
अमान्य वोट: 15
सी.पी. राधाकृष्णन: 452 वोट
बी. सुदर्शन रेड्डी: 300 वोट

दिलचस्प बात यह रही कि इस बार भी 15 वोट अमान्य पाए गए। 2017 में 11 और 2022 में 15 वोट अमान्य हुए थे। माना जा रहा है कि कई सांसदों ने निर्धारित पेन की जगह दूसरा पेन इस्तेमाल कर लिया।

कौन-कौन डाले वोट

सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतदान किया। उनके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत दिग्गज नेताओं ने वोट डाला। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा व्हीलचेयर से मतदान केंद्र पहुंचे। जेल में बंद सांसद इंजीनियर रशीद ने भी वोट डाला।

किन दलों ने बनाई दूरी

बीजू जनता दल (BJD)
भारत राष्ट्र समिति (BRS)
शिरोमणि अकाली दल (SAD)
इन दलों ने चुनाव से दूरी बनाए रखी।

क्यों हुआ उपराष्ट्रपति चुनाव

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से अपना कार्यकाल पूरा होने से दो साल पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उनके पद छोड़ने के बाद यह चुनाव कराना पड़ा।

कौन हैं सी.पी. राधाकृष्णन?

मूल रूप से तमिलनाडु से आने वाले राधाकृष्णन ओबीसी गौंडर समुदाय से हैं।
उनका संबंध आरएसएस से रहा है।
1998 और 1999 में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए।
उन्हें 2023 में झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया और बाद में 2024 में महाराष्ट्र के राज्यपाल बने।
उन्होंने राज्यपाल रहते हुए विवादित बयानों से परहेज किया और एक संतुलित चेहरा बने रहे।

कौन हैं सुदर्शन रेड्डी?

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और गोवा के लोकायुक्त रह चुके हैं।
उन्होंने 2011 में रिटायरमेंट लिया।
नक्सल विरोधी अभियान सलवा जुडूम को असंवैधानिक ठहराने वाला ऐतिहासिक फैसला दिया था।
विदेशों में जमा कालेधन की जांच के लिए एसआईटी गठन का आदेश भी उन्हीं की बेंच ने दिया था।

राजनीतिक मायने

सी.पी. राधाकृष्णन की जीत से साफ है कि संसद में एनडीए का संख्याबल मजबूत है। विपक्ष ने एकजुटता का दावा किया, लेकिन 15 अमान्य वोटों ने उसके गणित को बिगाड़ दिया। इस जीत के साथ ही राधाकृष्णन अब भारत के 17वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं और राज्यसभा की कार्यवाही उनके हाथों में होगी।

RELATED ARTICLES

Most Popular