साध्वी ने बच्चों को सिखाया जीवन जीने का तरीका, मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच पर जोर
Highlights:
👉 निशुल्क शिक्षा केंद्र में विशेष कार्यक्रम का आयोजन
👉 साध्वी ने दिया आध्यात्मिक और जीवन मूल्यों का ज्ञान
👉 पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन पर जोर
👉 अवसाद और तनाव से बचने के बताए उपाय
👉 मुखिया ने बच्चों को दिया प्रोत्साहन

विस्तार:
गिरिडीह के महेशलुंडी स्थित निशुल्क शिक्षा केंद्र में बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन धर्म की एक साध्वी ने केंद्र पहुंचकर बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन जीने की कला के बारे में महत्वपूर्ण बातें बताईं।
साध्वी ने अपने संबोधन में कहा कि केवल किताबी ज्ञान सफलता के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि पढ़ाई के साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि जब तक व्यक्ति भीतर से संतुष्ट नहीं होता, तब तक वह समाज और देश की सेवा निस्वार्थ भाव से नहीं कर सकता।
उन्होंने ईमानदारी, सेवा और मानसिक शांति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आध्यात्मिक शक्ति ही व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
कर्म और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को कर्म के सिद्धांत के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही, वर्तमान समय में विद्यार्थियों के बीच बढ़ती अवसाद और आत्महत्या जैसी समस्याओं पर चिंता जताते हुए उनसे बचाव के उपाय भी बताए गए। साध्वी ने सकारात्मक सोच और मानसिक दृढ़ता को इन समस्याओं से दूर रहने का सबसे प्रभावी तरीका बताया।
मुखिया ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय मुखिया शिवनाथ साव ने भी बच्चों को संबोधित करते हुए उन्हें हमेशा खुश और सकारात्मक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि मन में उत्साह और खुशी बनी रहेगी, तो तनाव दूर रहेगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ाई करने और एक जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की। अंत में उन्होंने साध्वी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक सत्र बच्चों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
यह कार्यक्रम बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक और नैतिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
