Thursday, February 12, 2026
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‘मृत कानून’ के सहारे झारखंड पुलिस! BNSS लागू, फिर भी FIR में CrPC — अम्बा प्रसाद का बड़ा आरोप

BNSS लागू हुए डेढ़ साल बीतने के बाद भी झारखंड के थानों में पुराने CrPC के तहत FIR दर्ज होने का आरोप, कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद ने उठाए गंभीर सवाल

Highlights

▪ BNSS 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू
▪ 2026 में भी झारखंड थानों में FIR CrPC के तहत दर्ज
▪ अम्बा प्रसाद ने इसे संवैधानिक और कानूनी चूक बताया
▪ गलत FIR से अपराधियों को मिल सकता है कानूनी फायदा
▪ मुख्यमंत्री और झारखंड हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

विस्तार

रांची।  झारखंड की कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद ने आरोप लगाया है कि देश में नया कानून लागू होने के बावजूद झारखंड की पुलिस अब भी पुराने और अप्रभावी कानून के तहत काम कर रही है। उन्होंने इसे न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि संवैधानिक चूक करार दिया है।

रांची ज्यूडिशियल एकेडमी के बाहर आयोजित पहली राष्ट्रीय कानूनी कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रेस से बातचीत में अम्बा प्रसाद ने कहा कि 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2026 में भी झारखंड के थानों में FIR पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धाराओं में दर्ज की जा रही हैं।

BNSS लागू, लेकिन FIR अब भी CrPC की धाराओं में

कांग्रेस विधायक ने स्पष्ट रूप से बताया कि—

  • कानूनन अनिवार्य है BNSS की धारा 173
  • लेकिन झारखंड पुलिस आज भी CrPC की धारा 154 का उपयोग कर रही है

जबकि CrPC अब देश में प्रभावी कानून ही नहीं रहा है। अम्बा प्रसाद ने कहा कि यह केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

डेढ़ साल बाद भी सिस्टम अपडेट नहीं होना बड़ी लापरवाही

अम्बा प्रसाद ने कहा कि BNSS लागू हुए डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद—

  • ऑनलाइन FIR सिस्टम
  • सरकारी फॉर्म
  • पुलिस प्रक्रिया

अब तक अपडेट नहीं की गई है। उन्होंने इसके लिए गृह विभाग, अभियोजन सेल और प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया और इसे संस्थागत विफलता बताया।

गलत कानून में दर्ज FIR से अपराधियों को मिल सकता है फायदा

कांग्रेस विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर FIR गलत या अप्रभावी कानून के तहत दर्ज होती हैं, तो आगे चलकर अदालतों में वे कमजोर साबित हो सकती हैं। इसका सीधा लाभ अपराधियों को मिलेगा और आम नागरिकों को न्याय पाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून के रक्षक ही “मृत कानून” का सहारा लेंगे, तो आम जनता को इंसाफ कैसे मिलेगा?

सरकार और विपक्ष—दोनों की चुप्पी पर सवाल

अम्बा प्रसाद ने इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष—दोनों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है, फिर भी न सरकार गंभीरता दिखा रही है और न ही विपक्ष दबाव बना रहा है।

मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

कांग्रेस विधायक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड हाईकोर्ट से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह तकनीकी चूक झारखंड की कानून व्यवस्था को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती है।

बड़ा सवाल बरकरार

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या झारखंड में कानून बदल गया है, लेकिन सिस्टम अब भी पुराने दौर में अटका हुआ है? और अगर पुलिस मृत कानून के सहारे काम करती रही, तो ज़िंदा इंसाफ आम लोगों तक आखिर कब पहुंचेगा?

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