बिना नोटिस नौकरी से हटाने का आरोप, बहाली की मांग को लेकर CIP चौक पर धरना
Highlights
- केंद्रीय मानसिक चिकित्सा संस्थान (CIP), कांके में 156 सुरक्षाकर्मी नौकरी से हटाए गए
- बिना पूर्व सूचना, नोटिस या कारण बताए हटाने का आरोप
- 3 फरवरी से CIP कैंपस में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू
- सुरक्षाकर्मियों ने दो दशक की सेवा का दिया हवाला
- निदेशक ने कहा— नियुक्ति या हटाने का अधिकार उनके पास नहीं

विस्तार
रांची। कांके स्थित केंद्रीय मानसिक चिकित्सा संस्थान (CIP) में वर्षों से कार्यरत 156 सुरक्षाकर्मियों को नौकरी से हटाए जाने के विरोध में आज से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू हो गया है। नौकरी से निकाले गए सुरक्षाकर्मी CIP सुरक्षाकर्मी अधिकार संघर्ष समिति के बैनर तले 3 फरवरी से CIP कैंपस के भीतर CIP चौक के समीप धरने पर बैठ गए हैं।
आंदोलनरत सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से संस्थान में सेवा दे रहे थे और अपने पूरे कार्यकाल में उनके खिलाफ कभी भी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बावजूद 27 जनवरी 2026 को उन्हें SIS सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से यह सूचना दी गई कि उनकी सेवाओं की अब आवश्यकता नहीं है और सभी 156 सुरक्षाकर्मियों को नौकरी से हटा दिया गया है।
सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या स्पष्ट कारण के की गई, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सभी 156 सुरक्षाकर्मियों की अविलंब बहाली नहीं की गई और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र किया जाएगा।
निदेशक का पक्ष
वहीं इस पूरे मामले पर CIP के निदेशक बी. के. चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “किसी भी सुरक्षाकर्मी को नौकरी पर रखने या हटाने का अधिकार मेरे पास नहीं है। यह निर्णय एजेंसी स्तर पर लिया गया है।”
निदेशक के इस बयान के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को हटाने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया।
संस्थान की सुरक्षा पर भी सवाल
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अनुभवी सुरक्षाकर्मियों को हटाए जाने से संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल CIP परिसर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
आंदोलनरत सुरक्षाकर्मी
“हमने 20 साल तक ईमानदारी से सेवा दी, फिर भी बिना नोटिस हमें हटा दिया गया। जब तक बहाली नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।”
