कागज और दफ्तरों से निकलकर चौपाल तक पहुंचे फैसले, आदिवासी इलाकों में बदलेगा सत्ता का संतुलन
Highlights
- पेसा नियमावली की अधिसूचना शुक्रवार देर रात जारी
- अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को निर्णायक अधिकार
- बालू घाट, जमीन खरीद-बिक्री, शराब दुकान पर ग्राम सभा का फैसला
- हर महीने अनिवार्य ग्राम सभा बैठक, महिलाओं की मौजूदगी जरूरी
- छोटे विवादों के निपटारे का अधिकार भी ग्राम सभा को
- कांग्रेस-राजद ने बताया ऐतिहासिक फैसला
विस्तार:
रांची- झारखंड में अब वास्तव में गांव की मर्जी चलेगी। राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में वर्षों से कागजों और दफ्तरों में होने वाले फैसले अब सीधे चौपाल में ग्राम सभा के जरिए होंगे। शुक्रवार देर रात पेसा (PESA) नियमावली की अधिसूचना जारी होते ही आदिवासी इलाकों की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था का चेहरा पूरी तरह बदल गया है।
पेसा नियमावली लागू होने के बाद अब अफसर नहीं, बल्कि ग्राम सभा यह तय करेगी कि गांव में क्या होगा और क्या नहीं। केटेगरी-1 के बालू घाट (5 हेक्टेयर से कम), जमीन की खरीद-बिक्री, शराब दुकान खोलना, जंगल से मिलने वाले उत्पादों की बिक्री जैसे अहम फैसले अब ग्राम सभा के अधिकार क्षेत्र में आ गए हैं।
ग्राम सभा होगी और मजबूत
नई नियमावली के तहत अब ग्राम सभा की बैठक महज औपचारिकता नहीं रहेगी।
- हर महीने ग्राम सभा की बैठक अनिवार्य होगी
- बैठकों में महिलाओं की मौजूदगी जरूरी होगी
- फैसले खुले मंच पर लिए जाएंगे
- गांव के छोटे-मोटे विवाद सुलझाने का अधिकार भी ग्राम सभा को दिया गया है
सरकार का दावा है कि इस नियमावली से आदिवासी इलाकों में सत्ता का संतुलन बदलेगा और वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक उपेक्षा खत्म होगी।

कांग्रेस का पक्ष
इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि गठबंधन सरकार ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे, उन्हें एक-एक कर पूरा किया जा रहा है। पेसा कानून उनमें से एक अहम वादा था। उन्होंने कहा कि पेसा कानून झारखंड की आदिवासी अस्मिता के लिए बेहद जरूरी था और अब यह जमीन पर उतरता दिख रहा है।

राजद की प्रतिक्रिया
वहीं राजद प्रवक्ता मनोज कुमार ने कहा कि गठबंधन सरकार इस फैसले के लिए बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले भी बीजेपी की सरकार रही, लेकिन किसी ने पेसा कानून लागू करने की हिम्मत नहीं की। हेमंत सरकार ने इसे लागू कर दिखाया है, जिससे जल, जंगल, जमीन और ग्राम सभा सभी मजबूत होंगे।
