झारखंड में बढ़ती ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन का बड़ा फैसला, परीक्षाओं को लेकर दी गई छूट
Highlights:
- झारखंड के 12 जिलों में शीतलहरी का येलो अलर्ट जारी
- रांची में अगले आदेश तक भारी ठंड की चेतावनी
- केजी से 12वीं तक सभी स्कूल 31 दिसंबर तक बंद
- प्रतियोगी व स्कूल परीक्षाओं पर नहीं लगी रोक
- मौसम विभाग की चेतावनी पर आगे बढ़ सकता है आदेश
विस्तार :
झारखंड में शीतलहरी से बढ़ी ठिठुरन
रांची। झारखंड इन दिनों कड़ाके की ठंड और शीतलहरी की चपेट में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान राज्य के 12 जिलों में शीतलहरी चलने का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार और रविवार को न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है।
इन जिलों में शीतलहरी की चेतावनी
मौसम विभाग ने जिन जिलों में शीतलहरी की संभावना जताई है, उनमें रांची, गढ़वा, पलामू, चतरा, लोहरदगा, लातेहार, गुमला, खूंटी, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग और कोडरमा शामिल हैं।
रांची में स्कूल 31 दिसंबर तक बंद
भीषण ठंड को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया है। डीसी के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने रांची जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी विद्यालयों (केजी से 12वीं तक) को आज से 31 दिसंबर तक बंद रखने का आदेश जारी किया है। यह आदेश बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लागू किया गया है।
परीक्षाओं को लेकर क्या है स्थिति?
इस मामले में जिला प्रशासन ने साफ किया है कि
- स्कूल बंद रहेंगे, लेकिन
- यदि किसी विद्यालय में परीक्षा निर्धारित है, तो उसका संचालन स्कूल प्रबंधन अपने विवेक और समय-सारिणी के अनुसार कर सकता है।
यानी, परीक्षाओं पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई गई है। “अगर इस अवधि में किसी स्कूल में परीक्षा है, तो स्कूल प्रबंधन अपने विवेक से परीक्षा का आयोजन कर सकता है।”
आगे बढ़ सकता है आदेश
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि अगर मौसम विभाग की ओर से शीतलहरी और ठंड को लेकर चेतावनी जारी रहती है, तो बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए स्कूल बंद रखने की अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि वे मौसम को देखते हुए सावधानी बरतें और आदेशों का सख्ती से पालन करें। झारखंड में बढ़ती ठंड ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। प्रशासन सतर्क है और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हालात के अनुसार आगे भी फैसले ले सकता है।
