रांची: झारखंड सरकार द्वारा जारी “माध्यमिक आचार्य (कक्षा 9 से 12), प्राचार्य और अशैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्त नियमावली, 2025” और विज्ञापन संख्या 02/2025 को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
यह याचिका संगीता कुमारी की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने दायर की है।
क्या है मामला
अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत में कहा कि राज्य सरकार ने कक्षा 9–10 और कक्षा 11–12 के शिक्षकों के पदों को एकसाथ मिला दिया है।
साथ ही, सभी पदों के लिए स्नातकोत्तर योग्यता अनिवार्य कर दी गई है।
एनसीटीई के विनियमों के अनुसार:
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कक्षा 9–10 के लिए स्नातक,
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कक्षा 11–12 के लिए स्नातकोत्तर आवश्यक है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार का यह कदम हजारों स्नातक अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन करता है।
अदालत से क्या मांगा गया
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माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति नियम, 2025 की धारा 9 और
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विज्ञापन संख्या 02/2025 की धारा 4 को अवैध घोषित करने की मांग।
साथ ही राज्य सरकार को एनसीटीई विनियमों के अनुसार नियमों में संशोधन करने का निर्देश देने की भी अपील की गई है।
भर्ती प्रक्रिया पर रोक की मांग
याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत के रूप में अदालत से अनुरोध किया है कि —
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विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत भर्ती प्रक्रिया को स्थगित किया जाए,
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प्रभावित अभ्यर्थियों को प्रोविजनल आवेदन और चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जाए।
क्या होगा असर
यह मामला वर्तमान में झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का फैसला राज्य के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर डाल सकता है।
मुख्य बिंदु
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माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियम 2025 पर याचिका
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एनसीटीई विनियमों का उल्लंघन करने का आरोप
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भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक की मांग
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हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित
