Saturday, June 13, 2026
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क्या है प्रभु जगन्नाथ रथ यात्रा महत्व जानिए

जगन्नाथ रथ यात्रा इस साल 27 जून, शुक्रवार से शुरू हो रही है। हर साल ओडिशा के पुरी में आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्धितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की एक बड़ी रथयात्रा निकलती है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में श्रीकृष्ण, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सजाया जाता है।

रांची में भी जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है |  रथ यात्रा के पहले दिन प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और माता सुभद्रा के विग्रह गर्भगृह से बाहर आते हैं | फिर, रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी जाते हैं | यहां नौ दिनों तक जगन्नाथ स्वामी अपनी मौसी के घर पर विश्राम करते हैं | इसके बाद 10वें दिन वापस रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर लौट आते हैं |

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा में शामिल होने या भगवान के दर्शन करने मात्र से भक्तों के सभी पापों का नाश हो जाता है | इसके साथ ही भक्तों को जगन्नाथ स्वामी का आशीर्वाद मिलता है | कहा जाता है कि रथ यात्रा के पहले और आखिरी दिन रथ खींचने से भक्तों पर प्रभु की विशेष कृपा बरसती है | रथ यात्रा के आखिरी दिन को ‘घुरती रथ’ भी कहा जाता है |

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़ी एक और धार्मिक मान्यता यह है कि रथ यात्रा में दान करने से इसका अक्षय फल प्राप्त होता है।

पद्म पुराण की कहानी के अनुसार एक बार आषाढ़ के महीने में सुभद्रा ने भगवान जगन्नाथ से शहर देखने की इच्छा जताई। तब जगन्नाथ भगवान ने अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाया। वे उन्हें नगर दिखाने के लिए निकल पड़े। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी अपनी मौसी के घर गुंडिचा भी गए।  फिर, नगर यात्रा पूरी कर वापस लौट आये | इसी के बाद से यह अद्भुत परंपरा मनाई जाती है | हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को तीनों भाई-बहन रथ पर सवार होकर निकलते हैं | रथ यात्रा में सबसे आगे प्रभु बलराम का रथ, बीच में बहन सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे जगन्‍नाथ स्वामी का रथ होता है |

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