बोकारो : एशिया महादेश की सबसे बड़ी फैक्ट्री स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया को अपनी जमीन देकर हुए विस्थापित बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज हैं, लगभग तीन दर्जन से अधिक गांवों में पीने के पानी के लिए हाहाकार मची है। वैसे ईन विस्थापितों की माने तो उन्होंने अपनी जमीन देकर बोकारो स्टील प्लांट को लगाया पूरे शहर के लोगों के पीने के पानी के लिए बोकारो डैम बनवाया ।
बोकारो के नगर वासियों को पानी की सुविधा तो मिल गई लेकिन वही विस्थापित खुद बूंद बूंद पानी के लिए वर्षों से तरस गए हैं अपनी प्यास के लिए ग्रामीणों को प्रतेक दिन पूरे परिवार के साथ संघर्ष कर दो किलोमीटर दूर डैम से पानी लाना पड़ता है तब जाकर अपनी प्यास वह बुझा पाते है और खाना बना पाते है दिनचर्या का सभी काम उसी डैम के पानी से करते है कुछ ग्रामीण पानी खरीद कर अपनी प्यास बुझाते है ।
आप कभी भी जाए महिला हो या पुरुष या हो बच्चे सबके हाथों में गैलन बाल्टी लिए सड़कों पर कभी भी वह ग्रामीण नजर आता है अपनी आपबीती को उन ग्रामीणों ने सांसद विधायक और बोकारो के आला अधिकारी को बताया लेकिन उन्होंने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर देते है बनसिमली के ग्रामीण अपने आप को रिफ्यूजी मानते हैं बनसिमली ग्रामीण कहते है की हमे सिर्फ वोट देने का अधिकार है लेकिन सरकारी लाभ लेने का कोई अधिकार नहीं है और यह मानते हैं कि वोट देकर सांसद विधायक को चुनते हैं लेकिन अपनी गांव की समस्या को दूर करने के लिए न मुखिया चुन पाते हैं ना जिला पार्षद ना ही वार्ड सदस्य ना जिला में है न ही चास नगर निगम में है वह अब अपने आप को ही रिफ्यूजी मानते हैं ग्रामीण कई समस्या से जूझ रहे है लेकिन वह अपनी कष्ट का किसी को न बता पाते है और ना ही उन कष्टों का निवारण हो पा रहा है।
बनसिमली के ग्रामीण यह भी मानते हैं कि ना उन्हें केंद्र सरकार की योजना उनके घर तक पहुंच पा रही है ना ही झारखंड राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है वह यह भी मान रहे हैं कि उनकी तो जैसे तैसे कट गई लेकिन वह अपने बाल बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं और इस बार यह मन बना बैठे हैं सांसद का चुनाव हो आने वाले 6 माह बाद विधानसभा चुनाव उन जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाएंगे । जो उनके दुखड़ा को सुनकर लिखित आश्वासन देगा बनसिमली गांव की ग्रामीण उन्हीं को अपना पूरे गांव के मतों से लबा लव कर सांसद हो या विधानसभा भेजने का काम करेंगे ।
बनसिमली के ग्रामीण अब किसी भी प्रतिनिधि की बात न सुनेगे ना ही किसी भी जन प्रतिनिधि को गांव के दहलीज में घुसने देगे। विधायक हो या सांसद उनका स्वागत झारूओं से और चपलिया कर करेगे । बनसिमली गांव की आबादी 2000 ऊपर की है
