नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अ. भा. प्रतिनिधि सभा का आयोजन 15 से 17 मार्च तक नागपुर के रेशिम बाग में हुआ। इसमें प्रमुख रूप से अयोध्या के श्रीराम मंदिर पर प्रस्ताव पारित हुआ है। इस प्रस्ताव के जरिए संघ ने श्रीराम मंदिर के लिए बलिदान देने वाले राम भक्तों और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का स्मरण कर उन्हें धन्यवाद दिया है। रा. स्व. संघ स्पष्ट तौर पर कहा है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण राष्ट्र के पुनरुत्थान का प्रतीक है। मंदिर निर्माण के साथ ही अब संघ राम राज्य की कल्पना को साकार करने के लिए प्रयासरत है।
उल्लेखनीय है कि अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को आयोजित श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा था, “अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो गया है, अब देश में रामराज्य आना चाहिए।” राम मंदिर निर्माण के बाद संघ अब सुशासन और लोकहित को सुनिश्चित करने वाले रामराज्य के लिए प्रयासरत है। संघ की प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्ताव में संघ ने मंदिर के लिए बलिदान देने वाले कारसेवकों, सरकार व प्रशासन सहित आंदोलनों में शामिल शोधकर्ताओं, पुरातत्वविदों, विचारकों, कानूनविदों, मीडिया और पूरे हिन्दू समाज के योगदान का उल्लेख किया है।
