जयपुर से भारत यात्रा पर निकली साइकिलिस्ट, 64 हजार किमी का अनुभव; अब कोलकाता होते हुए सिलीगुड़ी तक का सफर
Highlights:
👉 5000 किमी साइकिल यात्रा कर रांची पहुंचीं आशा मालवीय
👉 नारी शक्ति, देशभक्ति और साहस का दे रहीं संदेश
👉 अब तक 64,000 किमी साइकिल यात्रा पूरी कर चुकीं
👉 कन्याकुमारी से सियाचिन तक भी कर चुकी हैं सफर
👉 रांची से कोलकाता होते हुए सिलीगुड़ी जाएंगी
विस्तार
रांची पहुंची प्रेरणा की साइकिल यात्रा
भारतीय सेना दिवस के अवसर पर जयपुर से भारत यात्रा पर निकली साइकिलिस्ट आशा मालवीय 5000 किलोमीटर की दूरी तय कर राजधानी रांची पहुंची हैं। उनकी यह यात्रा नारी शक्ति, देशभक्ति और अदम्य साहस के संदेश को समर्पित है।
नारी शक्ति का दे रहीं संदेश
आशा मालवीय का कहना है कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य देशभर की महिलाओं को आत्मनिर्भर और मजबूत बनने के लिए प्रेरित करना है। वे साइकिल यात्रा के जरिए समाज में सकारात्मक संदेश फैलाना चाहती हैं।
64 हजार किमी का सफर तय
उन्होंने बताया कि अब तक वे अपने जीवन में करीब 64,000 किलोमीटर साइकिल चला चुकी हैं। इससे पहले वे कन्याकुमारी से सियाचिन तक भी लंबी साइकिल यात्रा कर चुकी हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
आगे का सफर जारी
रांची पहुंचने के बाद आशा मालवीय ने बताया कि उनकी यात्रा अभी जारी है। यहां से वे कोलकाता होते हुए सिलीगुड़ी तक का सफर पूरा करेंगी।
सीसीएल अधिकारियों से मुलाकात
रांची में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने सीसीएल पहुंचकर अधिकारियों से भी मुलाकात की और अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए।
कुल मिलाकर, आशा मालवीय की यह साइकिल यात्रा न सिर्फ साहस की मिसाल है, बल्कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली एक मजबूत पहल भी है।

