Monday, March 30, 2026
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जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव: लिव-इन कपल्स को भी ‘विवाहित’ माना जाएगा

सरकार के नए FAQ में बदलाव के संकेत, ‘स्थिर संबंध’ को मिलेगी वैवाहिक पहचान

Highlights:

👉 जनगणना 2027 से जुड़ा नया बड़ा बदलाव
👉 लिव-इन कपल्स को ‘मैरिड’ श्रेणी में गिना जा सकता है
👉 ‘स्थिर संबंध’ को मिलेगी मान्यता
👉 फैसले पर सामाजिक बहस तेज
👉 परिभाषा और दुरुपयोग को लेकर उठे सवाल

विस्तार:

समाज के बदलते स्वरूप की झलक
आज के बदलते समाज में रिश्तों की परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं। जो संबंध पहले सामाजिक स्वीकृति के लिए संघर्ष करते थे, अब उन्हें सरकारी दस्तावेजों में भी जगह मिलने लगी है। जनगणना 2027 से जुड़े एक नए FAQ ने इसी बदलाव की ओर इशारा किया है।

 टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना 2027 से जुड़े एक नए FAQ में बड़ा बदलाव सामने आया है। इसके तहत अगर कोई लिव-इन कपल खुद को ‘स्थिर संबंध’ में मानता है, तो उसे ‘मैरिड’ यानी विवाहित के रूप में गिना जा सकता है।

डिजिटल और आधुनिक होगी जनगणना
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक प्रणाली पर आधारित होगी। लोगों को “सेल्फ-एन्यूमरेशन” की सुविधा मिलेगी, जिसके तहत वे खुद ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसी पोर्टल के FAQ में यह स्पष्ट किया गया है कि “स्थिर संबंध” वाले कपल को विवाहित माना जाएगा।

कैसे होगी प्रक्रिया
जनगणना का हाउसलिस्टिंग फेज कुल 45 दिनों का होगा। पहले 15 दिनों तक लोग खुद ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे, जबकि अगले 30 दिनों में अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। यह प्रक्रिया OTP आधारित होगी और घर की लोकेशन का जियो-टैगिंग भी अनिवार्य रहेगा।

कानूनी मान्यता नहीं, सिर्फ डेटा उद्देश्य
यह स्पष्ट किया गया है कि यह बदलाव केवल जनगणना के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी तौर पर विवाह का दर्जा मिल गया है। यह सिर्फ समाज की वास्तविक स्थिति को बेहतर तरीके से समझने का प्रयास है।

‘स्थिर संबंध’ पर उठे सवाल
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल “स्थिर संबंध” की परिभाषा को लेकर उठ रहा है। फिलहाल इसके लिए कोई स्पष्ट कानूनी मानदंड तय नहीं किया गया है और यह पूरी तरह कपल की स्वयं की घोषणा पर आधारित होगा। इससे दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।

समर्थन और विरोध
एक ओर इसे आधुनिक सोच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे पारंपरिक सामाजिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे विवाह संस्था पर असर पड़ सकता है।

क्यों है अहम फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बदलते सामाजिक ढांचे को स्वीकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे उन लोगों को भी पहचान मिलेगी, जो लंबे समय से लिव-इन में रह रहे हैं लेकिन आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं हो पाते थे।

कुल मिलाकर, जनगणना 2027 सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि बदलते भारतीय समाज की नई तस्वीर पेश करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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