न्यू मैक्सिको की ज्यूरी ने Facebook और Instagram को बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने का दोषी माना
Highlights:
👉 Meta पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3000–3500 करोड़) का जुर्माना
👉 बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने का आरोप
👉 सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को प्राथमिकता देने का दावा
👉 एल्गोरिदम पर बच्चों को ज्यादा समय तक रोकने का आरोप
👉 Meta ने फैसले को चुनौती देने की कही बात
विस्तार:
अमेरिका के न्यू मैक्सिको में सोशल मीडिया कंपनी Meta को बड़ा झटका लगा है। सात हफ्तों तक चली सुनवाई के बाद ज्यूरी ने कंपनी को बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने और यौन शोषण से जुड़े जोखिम छिपाने का दोषी ठहराया है।
इस मामले में ज्यूरी ने Meta पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3000–3500 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। इस फैसले को टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला:
ज्यूरी ने पाया कि Meta, जो Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म संचालित करती है, ने सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को प्राथमिकता दी। साथ ही बच्चों के लिए मौजूद खतरों को छिपाने और भ्रामक दावे कर यूजर्स को गुमराह करने के आरोप भी साबित हुए।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी के एल्गोरिदम इस तरह डिजाइन किए गए थे कि यूजर्स, खासकर बच्चे, लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बने रहें। इसका असर उनकी मानसिक सेहत पर पड़ा।
हजारों मामलों के आधार पर जुर्माना:
ज्यूरी ने हर उल्लंघन को अलग मानते हुए कुल 375 मिलियन डॉलर का दंड तय किया। मामले में हजारों बच्चों के प्रभावित होने की बात सामने आई। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इससे अधिक जुर्माने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल यही राशि तय की है।
फैसले के बाद भी शेयर में बढ़त:
दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले के बाद Meta के शेयरों में करीब 5% की बढ़त देखी गई, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशकों पर इसका ज्यादा नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
Meta की प्रतिक्रिया:
Meta ने इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि वह लगातार अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है, लेकिन हानिकारक कंटेंट को पूरी तरह रोकना एक बड़ी चुनौती है।
बढ़ता दबाव:
यह मामला अकेला नहीं है। अमेरिका के 40 से ज्यादा राज्यों में Meta के खिलाफ इसी तरह के केस चल रहे हैं। आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म युवाओं में लत और मानसिक तनाव बढ़ा रहे हैं। वहीं, अभिभावक समूहों ने इस फैसले को “ऐतिहासिक” बताया है।

