Friday, March 20, 2026
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गिरिडीह: संत जोसेफ स्कूल में फीस को लेकर बवाल, सैकड़ों अभिभावकों का धरना

प्राचार्य की अनुपस्थिति से भड़का गुस्सा, 400-500 अभिभावकों ने गेट पर किया प्रदर्शन

Highlights

  • संत जोसेफ स्कूल में फीस और एडमिशन शुल्क को लेकर विवाद
  • सैकड़ों अभिभावकों ने स्कूल गेट पर किया धरना
  • प्राचार्य से मुलाकात नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश
  • पहले भी हो चुका है विरोध, लेकिन नहीं निकला समाधान
  • प्राचार्य को हटाने की मांग तेज
  • व्हाट्सएप ग्रुप हैक होने का भी आरोप

विस्तार

गिरिडीह- शहर के संत जोसेफ स्कूल में फीस और एडमिशन शुल्क को लेकर अभिभावकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को करीब 400 से 500 अभिभावक स्कूल गेट पर जुटे और जमकर नारेबाजी करते हुए धरना-प्रदर्शन किया।

प्राचार्य की अनुपस्थिति से बढ़ा गुस्सा

अभिभावकों का कहना है कि वे पिछले तीन दिनों से प्राचार्य से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्राचार्य लगातार अनुपस्थित रहे। इसी कारण अभिभावकों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने स्कूल गेट के सामने धरना दे दिया।

पहले भी हुआ था प्रदर्शन

गुरुवार को भी बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध जताया। स्थिति को संभालने के लिए पचंबा थाना प्रभारी राजीव कुमार, स्कूल सेक्रेटरी और वार्ड 6 के पार्षद संजीव कुमार की मौजूदगी में जमीन पर बैठक कराई गई। हालांकि लंबी चर्चा के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका और पूरा मामला केवल आश्वासनों तक ही सीमित रह गया, जिससे अभिभावकों में नाराजगी और बढ़ गई।

प्राचार्य के रवैये पर सवाल

अभिभावकों ने वर्तमान प्राचार्य के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जहां पूर्व प्राचार्य अभिभावकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझते थे, वहीं मौजूदा प्राचार्य का रवैया असहयोगात्मक बताया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते अब अभिभावकों के बीच प्राचार्य को हटाने की मांग तेज होती जा रही है।

व्हाट्सएप ग्रुप हैक का आरोप

मामले में एक और नया विवाद जुड़ गया है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल का पेरेंट्स व्हाट्सएप ग्रुप हैक कर लिया गया है, जिसके लिए वे स्कूल प्रशासन को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

बढ़ता जा रहा विवाद

फिलहाल यह मामला तूल पकड़ चुका है और स्कूल प्रबंधन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि स्कूल प्रशासन कब इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और अभिभावकों की समस्याओं का समाधान किस तरह और कितनी जल्दी निकाला जाता है।

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