Tuesday, March 17, 2026
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बिहार राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को झटका, NDA का क्लीन स्वीप; तेजस्वी यादव कोलकाता रवाना

पांचों सीटों पर NDA की जीत, RJD उम्मीदवार ए.डी. सिंह को हार; तेजस्वी यादव के कोलकाता जाने से राजनीतिक चर्चाएं तेज

Highlights:

  • बिहार राज्यसभा चुनाव में NDA ने पांचों सीटों पर दर्ज की जीत
  • महागठबंधन के उम्मीदवार ए.डी. सिंह को मिली हार
  • जीत के लिए 41 वोट जरूरी, महागठबंधन को मिले सिर्फ 37 वोट
  • महागठबंधन के 4 विधायक वोटिंग में नहीं पहुंचे
  • चुनाव नतीजों के बाद तेजस्वी यादव पटना से कोलकाता रवाना

विस्तार

राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा
बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी सफलता मिली है। पांचों सीटों पर NDA ने जीत दर्ज करते हुए क्लीन स्वीप कर लिया। दूसरी ओर महागठबंधन को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

RJD उम्मीदवार को मिली हार

महागठबंधन की ओर से राज्यसभा के लिए ए.डी. सिंह को उम्मीदवार बनाया गया था। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिल सकी और वे चुनाव हार गए। NDA के उम्मीदवारों ने बहुमत हासिल कर सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया।
महागठबंधन के चार विधायक नहीं पहुंचे
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 वोट की आवश्यकता थी। NDA के सभी 202 विधायकों ने मतदान किया, जबकि महागठबंधन की ओर से केवल 37 विधायक ही मतदान के लिए पहुंचे। महागठबंधन के चार विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए, जिनमें कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक शामिल थे। इसे हार का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
नीतीश कुमार और नितिन नबीन राज्यसभा पहुंचे
NDA की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा नेता नितिन नबीन भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। दोनों नेताओं को 44-44 वोट मिले। इसके अलावा रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 वोट प्राप्त हुए।

पांचवीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला

पांचवीं सीट के लिए मुकाबला काफी रोचक रहा। पहली वरीयता के वोटों में भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम को 30 वोट मिले थे। हालांकि दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती में उन्होंने राजद के ए.डी. सिंह को पीछे छोड़ दिया। ए.डी. सिंह को कुल 37 वोट मिले।
तेजस्वी यादव के कोलकाता जाने से चर्चाएं
राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पटना से कोलकाता के लिए रवाना हो गए। उनके अचानक कोलकाता जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और इसे बिहार की राजनीति में नई हलचल के रूप में देखा जा रहा है।

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