Monday, March 2, 2026
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ईरान संकट से बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 2,700 अंक टूटा, निवेशकों के 6 लाख करोड़ स्वाहा

निफ्टी 500 अंकों से ज्यादा टूटा, बैंक निफ्टी में 1300 अंकों की गिरावट; निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे

Highlights

  • सेंसेक्स 2,743 अंक टूटकर 78,543 पर खुला
  • निफ्टी 519 अंक गिरकर 24,659 पर
  • बैंक निफ्टी में 1,300 अंकों से ज्यादा गिरावट
  • निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये डूबे
  • 162 शेयरों में लोअर सर्किट
  • कच्चा तेल 100 डॉलर तक पहुंचने की आशंक

विस्तार

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। सोमवार को बाजार खुलते ही जबरदस्त बिकवाली शुरू हो गई और प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ खुले।

बाजार की शुरुआत में भारी गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स 2,743 अंक यानी 3.38% टूटकर 78,543 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 519 अंक यानी 2.06% की गिरावट के साथ 24,659 पर खुला। बैंकिंग शेयरों पर भी जबरदस्त दबाव देखने को मिला और बैंक निफ्टी में 1,300 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश की। सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स लगभग 1,000 अंकों की गिरावट के साथ 80,282 के आसपास ट्रेड करता दिखाई दिया, वहीं निफ्टी भी करीब 300 अंक टूटकर 24,900 के नीचे कारोबार करता नजर आया।

6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

शेयर बाजार में आई इस भारी गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा और कुछ ही घंटों में बड़ी पूंजी साफ हो गई। शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप 463.50 लाख करोड़ रुपये था, जो सोमवार को घटकर 457.50 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार खुलते ही महज कुछ घंटों के भीतर करीब 6 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन खत्म हो गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?

बाजार की इस बड़ी गिरावट के बीच बीएसई टॉप-30 के 29 शेयर लाल निशान पर कारोबार करते नजर आए। सबसे ज्यादा दबाव इंडिगो के शेयर पर दिखा, जिसमें करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एल एंड टी में लगभग 4% की कमजोरी रही, जबकि अडानी पोर्ट्स करीब 3% टूट गया। एटर्नल के शेयर में भी करीब 2% की गिरावट देखी गई। हालांकि इस भारी बिकवाली के बीच बीईएल (BEL) एकमात्र ऐसा शेयर रहा, जिसमें लगभग 1% की हल्की तेजी दर्ज की गई।

162 शेयरों में लोअर सर्किट

बीएसई पर व्यापक बिकवाली का असर साफ तौर पर देखने को मिला। कुल 3,660 सक्रिय शेयरों में से 2,985 शेयर गिरावट में कारोबार करते नजर आए, जबकि महज 510 शेयरों में बढ़त रही और 165 शेयर स्थिर रहे। चिंताजनक बात यह रही कि 663 शेयर अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए, जबकि केवल 43 शेयर ही 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर थे। इसके अलावा 162 शेयरों में लोअर सर्किट लग गया, जो बाजार में भारी दबाव और निवेशकों के बीच फैली घबराहट का स्पष्ट संकेत है।

वैश्विक बाजारों पर भी दबाव

घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी दबाव साफ नजर आया। एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई, जहां जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 2.7% टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.43% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स भी कमजोर संकेत दे रहे हैं। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 1.11% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि डाउ जोंस फ्यूचर्स 1% से ज्यादा नीचे कारोबार करता नजर आया। इन संकेतों से स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बीच सतर्कता और दबाव का माहौल बना हुआ है।

कच्चे तेल में उछाल, भारत पर असर

भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तथा युद्ध की स्थिति गहराती है, तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। तेल की कीमतों में तेजी से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है, चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है और रुपये में कमजोरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार और अर्थव्यवस्था दोनों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति?

मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क लेकिन धैर्यपूर्ण रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए घबराहट में आकर निवेश संबंधी फैसले नहीं लेने चाहिए। पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना और जोखिम को संतुलित रखना इस समय बेहद जरूरी है। खासकर लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य रखने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर भरोसा बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। मिडिल ईस्ट संकट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं का असर सीधे भारतीय बाजारों पर पड़ता है, और आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।

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