वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराया; 196 रन का लक्ष्य चेज, प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर के बेबाक बयान
Highlights
- सुपर-8 के करो या मरो मुकाबले में भारत की जीत
- वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराया
- संजू सैमसन की 50 गेंदों पर नाबाद 97 रन
- 5 मार्च को मुंबई में इंग्लैंड से सेमीफाइनल
- छोटे योगदानों की अहमियत पर गंभीर का बयान

विस्तार
कोलकाता- टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 के अहम मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। 196 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया ने दबाव में शानदार बल्लेबाजी की। जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने 50 गेंदों पर नाबाद 97 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी पारी ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया और भारत ने आखिरी ओवरों में लक्ष्य हासिल कर लिया। अब भारत 5 मार्च को मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबला खेलेगा।
सैमसन पर भरोसा सही साबित
टूर्नामेंट की शुरुआत में सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया था, जिसे उनके खराब फॉर्म से जोड़ा गया। हालांकि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने साफ किया कि यह रणनीतिक फैसला था। उन्होंने कहा “हम जानते थे कि संजू में कितना दम है। उसके नाम तीन टी20 शतक हैं। हर खिलाड़ी खराब दौर से गुजरता है। कभी-कभी उसे दबाव से बाहर निकालना जरूरी होता है। हमें भरोसा था कि जरूरत पड़ने पर वह प्रदर्शन करेगा।”
‘छोटे योगदान भी उतने ही अहम’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब तिलक वर्मा और शिवम दुबे के योगदान पर सवाल उठा, तो गंभीर ने टीम वर्क पर जोर दिया। उन्होंने कहा “मुझे खुशी है कि आप हर योगदान की बात कर रहे हैं। कई सालों से हम सिर्फ कुछ खास योगदानों की ही चर्चा करते आए हैं।” “मेरे लिए शिवम के वो दो चौके उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने संजू के 97 रन। बड़ा योगदान सुर्खियां बटोरता है, लेकिन छोटे योगदान ही टीम को जीत दिलाते हैं।” गंभीर का यह बयान उनके अपने करियर की याद दिलाता है, जब 2007 और 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में उनकी अहम पारियों को अपेक्षित चर्चा नहीं मिली थी।
‘आंकड़ों से ज्यादा अनुभव’
गंभीर ने कहा कि वे केवल आंकड़ों पर भरोसा नहीं करते। “टी20 क्रिकेट समझ और आत्मविश्वास का खेल है। अनुभव सबसे बड़ी पूंजी है। आखिरी फैसला कप्तान का होता है।”
बुमराह की भूमिका
तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को इस मैच में रणनीतिक रूप से अलग-अलग समय पर गेंदबाजी के लिए उतारा गया। गंभीर ने कहा “वेस्टइंडीज का मध्यक्रम मजबूत है, इसलिए हमें बीच के ओवरों में बुमराह की जरूरत थी। वह हमारे सबसे भरोसेमंद गेंदबाज हैं।” भारत की यह जीत न केवल दबाव में शानदार चेज का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बड़े टूर्नामेंट में टीम वर्क, रणनीति और धैर्य ही असली कुंजी होते हैं।
