झारखंड राय विश्वविद्यालय के 6ठे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को दी बधाई; ‘विकसित भारत @2047’ में युवाओं की भूमिका पर जोर
Highlights
- झारखंड राय विश्वविद्यालय के 6ठे दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
- उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को दी बधाई और शुभकामनाएं
- शिक्षा को व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा
- ‘विकसित भारत @2047’ में युवाओं की अहम भूमिका बताई
- AI, डिजिटल तकनीक और नवाचार को भविष्य का आधार बताया
- उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, अनुसंधान और नैतिक मूल्यों पर बल

विस्तार
रांची, 25 फरवरी 2026। माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार ने आज झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के 6ठे दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि एक नई जीवन-यात्रा का शुभारंभ है।
शिक्षा का उद्देश्य क्या?
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण में करें।
‘विकसित भारत @2047’ में युवाओं की भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि भारत आज नए आत्मविश्वास और संकल्प के साथ विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
AI और तकनीकी युग की चुनौतियाँ
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व तीव्र तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्र नए अवसरों का द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक AI सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तकनीकी नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पेशेवर सफलता के साथ-साथ ईमानदारी, करुणा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की वास्तविक प्रतिष्ठा उसके पद से नहीं, बल्कि उसके कर्म और चरित्र से तय होती है।
झारखंड की संभावनाएँ
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड केवल प्राकृतिक संसाधनों की भूमि नहीं है, बल्कि संघर्ष, संस्कृति और अपार संभावनाओं की धरती है। यदि राज्य के युवा अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राज्य के विकास में करें, तो झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बना सकता है।
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता का आह्वान
उन्होंने कहा कि राज्य की उच्च शिक्षा को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि झारखंड के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट संस्थानों में शामिल हों। निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
प्रेरणादायक संदेश
अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा “हर महान उपलब्धि एक स्वप्न से प्रारंभ होती है। बड़े सपने देखिए, परिश्रम कीजिए और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहिए। असफलताओं से घबराइए मत, उनसे सीखकर उन्हें सफलता में बदल दीजिए।” उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जहां भी जाएं, अपने विश्वविद्यालय, परिवार और राज्य का नाम रोशन करें।
