Wednesday, February 25, 2026
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IISS रिपोर्ट का दावा: भारत-पाक गतिरोध बना दुनिया का सबसे लंबा BVR एयर कॉम्बैट, 87 घंटे चला हाई-टेक हवाई संघर्ष

‘मिलिट्री बैलेंस 2026’ में खुलासा; लंबी दूरी की मिसाइलों, राफेल और एडवांस्ड सेंसर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

Highlights

  • IISS की ‘मिलिट्री बैलेंस 2026’ रिपोर्ट में बड़ा दावा 
  • भारत-पाक के बीच 87 घंटे तक चला BVR एयर कॉम्बैट 
  • Beyond Visual Range तकनीक का व्यापक उपयोग 
  • राफेल, सुखोई-30MKI और लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल 
  • SCALP-EG और AASM HAMMER जैसे प्रिसिजन हथियारों का उल्लेख 
  • आधुनिक वायु युद्ध के नए दौर की झलक

विस्तार

लंदन। रक्षा एवं सुरक्षा विश्लेषण संस्था इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘मिलिट्री बैलेंस 2026’ में दावा किया है कि पिछले वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य गतिरोध आधुनिक वायु युद्ध के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना था। रिपोर्ट के अनुसार, यह टकराव लगभग 87 घंटे तक चला और इसे दुनिया का अब तक का सबसे लंबा बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) एयर-टू-एयर संघर्ष बताया गया है।

क्या होता है BVR एयर कॉम्बैट?

BVR (Beyond Visual Range) एयर कॉम्बैट ऐसी हवाई लड़ाई को कहा जाता है, जिसमें लड़ाकू विमान एक-दूसरे को नंगी आंखों से देखे बिना, लंबी दूरी की मिसाइलों के जरिए निशाना बनाते हैं। यानी पायलट को दुश्मन का विमान दृश्य सीमा में लाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि रडार और सेंसर की मदद से लक्ष्य को ट्रैक कर दूर से ही हमला किया जाता है।

यह आधुनिक युद्ध तकनीक उन्नत एडवांस्ड रडार सिस्टम, सैटेलाइट सपोर्ट, नेटवर्क-सेंट्रिक कमांड एंड कंट्रोल, और प्रिसिजन मिसाइल गाइडेंस सिस्टम पर आधारित होती है। इन प्रणालियों की मदद से विमान लक्ष्य की स्थिति, गति और दिशा का सटीक आकलन कर लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल दाग सकते हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के हवाई युद्धों में पारंपरिक आमने-सामने की “डॉगफाइट” की भूमिका कम होती जाएगी और उसकी जगह लंबी दूरी की, तकनीक-आधारित BVR मिसाइल टकराव अधिक निर्णायक साबित होंगे।

गतिरोध की पृष्ठभूमि

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने अत्याधुनिक राफेल और ukhoi-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों के जरिए जवाबी कार्रवाई की। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के माध्यम से एक पाकिस्तानी विमान को लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराए जाने का दावा किया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

इस्तेमाल हुए हाई-प्रिसिजन हथियार

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कार्रवाई के दौरान कुछ हाई-प्रिसिजन हथियारों के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। इनमें SCALP-EG क्रूज मिसाइल और AASM HAMMER गाइडेड बम शामिल बताए गए हैं। दावा किया गया है कि इन हथियारों को कथित तौर पर राफेल लड़ाकू विमानों से दागा गया। हालांकि, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषणात्मक रिपोर्टों में इस्तेमाल किए गए हथियारों और विमानों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।

आधुनिक युद्ध का नया अध्याय

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (IISS) के अनुसार यह टकराव पारंपरिक सीमा झड़पों से अलग प्रकृति का था। इसमें अत्यधिक दूरी से किए गए लक्षित हमले, हाई-एंड सेंसर सिस्टम का इस्तेमाल और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध तकनीक का प्रयोग देखा गया, जो आधुनिक सैन्य क्षमताओं की ओर इशारा करता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रणनीति दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन, वायु रक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता और भविष्य की सैन्य तैयारी को लेकर नई बहस को जन्म दे सकती है।

आधिकारिक स्थिति

दोनों देशों ने इस पूरे घटनाक्रम के कई सैन्य विवरण सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किए हैं। फिर भी IISS की रिपोर्ट ने इस गतिरोध को आधुनिक वायु युद्ध के एक अहम अध्याय के रूप में दर्ज किया है।

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