Tuesday, September 1, 2026
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ट्रंप का बड़ा दावा: भारत-पाक संघर्ष में हस्तक्षेप नहीं करता तो 3.5 करोड़ लोग मारे जाते, परमाणु युद्ध की आशंका थी

स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में बोले—पहले 10 महीनों में 8 युद्ध खत्म किए; भारत-पाक तनाव को बताया बेहद गंभीर

Highlights

  • ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष में हस्तक्षेप का किया दावा
  • परमाणु युद्ध की आशंका जताई
  • “3.5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी” — ट्रंप
  • स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में किया जिक्र
  • भारत और पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

विस्तार

वॉशिंगटन-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को लेकर बड़ा दावा किया है। मंगलवार रात (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह) व्हाइट हाउस में अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने पहले 10 महीनों में आठ युद्ध समाप्त कराए, जिनमें भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि परमाणु युद्ध की आशंका बन गई थी।

क्या कहा ट्रंप ने?

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा “मैंने अपने पहले 10 महीनों में आठ युद्ध समाप्त किए। पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था। अगर मैंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो लाखों लोगों की जान जा सकती थी।” ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें बताया था कि यदि हस्तक्षेप नहीं होता तो लगभग 3.5 करोड़ लोग मारे जा सकते थे।

अन्य देशों के विवाद का भी जिक्र

ट्रंप ने अपने भाषण में कंबोडिया और थाईलैंड सहित अन्य देशों के बीच विवादों को सुलझाने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रशासनिक पहल के कारण कई अंतरराष्ट्रीय तनाव कम हुए।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

ट्रंप के इस बयान पर भारत या पाकिस्तान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दावों की पुष्टि संबंधित देशों के आधिकारिक दस्तावेजों और कूटनीतिक रिकॉर्ड के आधार पर ही संभव है।

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर असर

भारत और पाकिस्तान के बीच समय-समय पर सीमा तनाव और सैन्य टकराव की स्थिति बनती रही है। हालांकि दोनों देश अब तक किसी बड़े परमाणु संघर्ष से बचते रहे हैं। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की सुरक्षा और भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव को लेकर वैश्विक समुदाय हमेशा सतर्क रहता है, इसलिए इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

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