करीब एक साल बाद मणिपुर में लोकतांत्रिक सरकार की वापसी, BJP विधायक दल ने चुना नया नेता
Highlights
- मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अंत
- BJP के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह बनेंगे नए मुख्यमंत्री
- 13 फरवरी 2025 से लागू था राष्ट्रपति शासन
- दिल्ली में BJP विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से चयन
- नई सरकार में उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को लेकर अटकलें तेज
विस्तार
दिल्ली/इंफाल- मणिपुर से इस वक्त की बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। लंबे समय से जारी राष्ट्रपति शासन आज समाप्त होने जा रहा है और राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह आज मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। करीब एक साल बाद राज्य में निर्वाचित सरकार की वापसी हो रही है, जिसे मणिपुर की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
12 फरवरी 2026 को खत्म होगा राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में जातीय हिंसा, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और राजनीतिक अस्थिरता के चलते 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। अब हालात में सुधार और राजनीतिक सहमति बनने के बाद राष्ट्रपति शासन को हटाने का फैसला लिया गया है।
BJP विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला
दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में हुई BJP विधायक दल की अहम बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। बैठक में पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके साथ ही यह तय हो गया कि खेमचंद सिंह मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री होंगे।
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?
- सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक
- मणिपुर विधानसभा के पूर्व स्पीकर
- राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कई अहम विभाग संभाले
- संगठन और प्रशासन—दोनों में लंबा और सशक्त अनुभव
पार्टी के भीतर उन्हें अनुभवी, संतुलित और स्वीकार्य चेहरा माना जाता है।
नई सरकार में नए चेहरे संभव
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में कुछ अहम नियुक्तियां हो सकती हैं—
- गोविंददास को गृह मंत्री बनाए जाने की चर्चा
- कुकी समुदाय से आने वाली नेमचा किपगेन को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की प्रबल संभावना
इन नियुक्तियों के जरिए सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश मानी जा रही है।
स्थिरता और शांति की उम्मीद
हिंसा और अनिश्चितता के लंबे दौर के बाद मणिपुर में नई सरकार का गठन राजनीतिक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता—
- कानून-व्यवस्था बहाल करना
- हिंसा प्रभावितों का पुनर्वास
- विकास और विश्वास बहाली
पर रहने वाली है।
