WEF दावोस में ट्रंप के बयान के बाद रूस की दो-टूक, विदेश मंत्रालय कर रहा है प्रस्ताव की समीक्षा
Highlights :
- WEF दावोस में डोनाल्ड ट्रंप ने किया रूस के शामिल होने का दावा
- नाटो महासचिव मार्क रूटे से मुलाकात के बाद दिया गया बयान
- रूस ने ट्रंप के दावे को तत्काल खारिज किया
- पुतिन बोले—अमेरिकी प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं
- रूस का विदेश मंत्रालय कर रहा है गाजा पीस बोर्ड प्रस्ताव का अध्ययन
विस्तार :
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर रूस ने स्पष्ट रूप से विराम लगा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस ने गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में हिस्सा लेने के लिए दावोस पहुंचे ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रूटे से मुलाकात के बाद यह दावा किया था।
ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों के भीतर रूस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आ गई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से मिले प्रस्ताव पर रूस अभी विचार कर रहा है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
पुतिन का बयान: अभी कोई फैसला नहीं
रूस की सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि “गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने को लेकर अमेरिका की ओर से जो प्रस्ताव मिला है, उसका फिलहाल रूस का विदेश मंत्रालय अध्ययन कर रहा है। उचित समय पर इस पर जवाब दिया जाएगा।” पुतिन ने साफ संकेत दिया कि ट्रंप द्वारा किया गया दावा समय से पहले और तथ्यों से परे है।
WEF दावोस में बढ़ी कूटनीतिक हलचल
गौरतलब है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में इस बार वैश्विक राजनीति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। गाजा संकट को लेकर कई देश किसी साझा समाधान की तलाश में हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने कथित तौर पर गाजा पीस बोर्ड का प्रस्ताव रखा है, जिसमें रूस सहित अन्य वैश्विक शक्तियों को शामिल करने की बात कही जा रही है। हालांकि रूस का यह रुख साफ करता है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच या शांति पहल में शामिल होने से पहले राजनयिक और रणनीतिक समीक्षा को प्राथमिकता देता है।
ट्रंप के दावों पर फिर सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप के किसी अंतरराष्ट्रीय दावे पर संबंधित देश ने तत्काल स्पष्टीकरण दिया हो। रूस के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि गाजा पीस बोर्ड को लेकर अभी वैश्विक सहमति बनना बाकी है और आने वाले दिनों में इस पर और कूटनीतिक बातचीत देखने को मिल सकती है।

