Friday, February 13, 2026
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चाईबासा सदर अस्पताल पर फिर उठे सवाल, एक परिवार के तीन सदस्य एचआईवी संक्रमित

सरकारी ब्लड बैंक से संक्रमित रक्त चढ़ाने का आरोप, स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल

Highlights –

  • चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक पर गंभीर लापरवाही का आरोप
  • पति, पत्नी और बड़े बच्चे में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि
  • 2023 में सिजेरियन डिलीवरी के दौरान रक्त चढ़ाने के बाद संक्रमण का शक
  • स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए, दस्तावेजों की हो रही समीक्षा
  • अक्टूबर 2025 में भी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में एचआईवी का मामला सामने आया था

विस्तार

चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम)- झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में खड़ी हो गई है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों के एचआईवी संक्रमित पाए जाने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और खासकर अस्पताल के ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले ने जिले में हड़कंप मचा दिया है और स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप तेज हो गए हैं।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह संक्रमण सदर अस्पताल के सरकारी ब्लड बैंक से उपलब्ध कराए गए रक्त के कारण फैला। परिवार के अनुसार, पति-पत्नी और उनका बड़ा बच्चा तीनों एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इससे जिले के एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक की जांच प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।

डिलीवरी के दौरान चढ़ाया गया था रक्त

परिवार ने बताया कि जनवरी 2023 में महिला की पहली डिलीवरी चाईबासा सदर अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए कराई गई थी। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर अस्पताल के ब्लड बैंक से रक्त चढ़ाया गया। आरोप है कि उसी समय महिला को संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया, जिससे वह एचआईवी संक्रमित हो गई।

दूसरी गर्भावस्था में हुआ खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला जून 2025 में दूसरी बार गर्भवती हुई। नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान उसकी एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद जब पति की जांच कराई गई, तो वह भी संक्रमित पाया गया।  2 जनवरी 2026 को महिला ने दूसरे बच्चे को जन्म दिया। इसी बीच उनका बड़ा बच्चा गंभीर रूप से बीमार पड़ा। जांच कराने पर उसकी रिपोर्ट भी एचआईवी पॉजिटिव आई, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

स्वास्थ्य विभाग की सफाई, जांच के आदेश

पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिमी सिंहभूम की सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरती मिंज ने कहा कि प्रारंभिक आरोपों के आधार पर सीधे ब्लड बैंक को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार को अस्पताल बुलाया गया है।  स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लड ट्रांसफ्यूजन की तारीख, डोनर की जांच रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज और पूरी प्रक्रिया की गहन जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है। अक्टूबर 2025 में भी इसी ब्लड बैंक से रक्त लेने वाले पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने अस्पताल प्रशासन और ब्लड बैंक की निगरानी व्यवस्था पर गहरा संदेह पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्या सच सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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