Friday, February 13, 2026
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BRICS डिजिटल करेंसी को जोड़ने का प्रस्ताव: RBI का बड़ा कदम, क्या तेज़ होगी डी-डॉलराइजेशन की रफ्तार?

रॉयटर्स का दावा— क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड और टूरिज्म पेमेंट को तेज़, सस्ता और आसान बनाने के लिए BRICS देशों की डिजिटल मुद्राओं को लिंक करने की तैयारी

Highlights

  • RBI ने BRICS देशों की डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया
  • मकसद: सीमा-पार व्यापार और पर्यटन भुगतान को तेज़ और कम खर्चीला बनाना
  • अमेरिकी डॉलर और SWIFT सिस्टम पर निर्भरता घटाने की कोशिश
  • प्रस्ताव को 2026 BRICS समिट के एजेंडे में शामिल करने की सिफारिश
  • भारत की e-रुपया और चीन का डिजिटल युआन इस पहल का अहम हिस्सा
  • तकनीकी इंटरऑपरेबिलिटी और गवर्नेंस सबसे बड़ी चुनौती

विस्तार

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक संभावित बड़े बदलाव की ओर संकेत करते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने BRICS देशों की डिजिटल मुद्राओं (CBDC) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य BRICS देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड और टूरिज्म पेमेंट को तेज़, सस्ता और अधिक प्रभावी बनाना है।

सूत्रों के अनुसार, RBI ने भारत सरकार को सिफारिश की है कि इस प्रस्ताव को 2026 में होने वाले BRICS समिट के एजेंडे में शामिल किया जाए। खास बात यह है कि 2026 BRICS समिट की मेजबानी भारत करेगा।

क्या है इस प्रस्ताव का मकसद?

RBI के इस प्रस्ताव के पीछे कई रणनीतिक लक्ष्य बताए जा रहे हैं—

  • BRICS देशों के बीच व्यापारिक लेन-देन को सरल बनाना
  • पारंपरिक भुगतान प्रणालियों की तुलना में कम समय और कम लागत
  • बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना
  • SWIFT जैसे पश्चिमी भुगतान नेटवर्क का वैकल्पिक ढांचा तैयार करना

यह प्रस्ताव 2025 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो BRICS समिट की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें सदस्य देशों के भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ने की बात कही गई थी।

BRICS देशों की डिजिटल करेंसी की मौजूदा स्थिति

  • भारत: e-रुपया दिसंबर 2022 में लॉन्च, करीब 70 लाख रिटेल यूजर्स
  • चीन: डिजिटल युआन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा
  • अन्य BRICS देश: सभी पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं, लेकिन पूरी तरह लॉन्च नहीं

RBI ने e-रुपये को बढ़ावा देने के लिए ऑफलाइन भुगतान, प्रोग्रामेबल सब्सिडी और फिनटेक वॉलेट जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं।

चुनौतियां क्या हैं?

सूत्रों के मुताबिक, इस योजना के रास्ते में कई तकनीकी और नीतिगत अड़चनें हैं—

  • अलग-अलग देशों की तकनीकी प्लेटफॉर्म को जोड़ना
  • गवर्नेंस और डेटा सुरक्षा पर सहमति
  • व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance) को संभालने के उपाय

इन्हें हल करने के लिए सेंट्रल बैंकों के बीच द्विपक्षीय फॉरेन एक्सचेंज स्वैप जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।

डी-डॉलराइजेशन पर बहस तेज

हालांकि RBI पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यह पहल डॉलर को हटाने के लिए नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डी-डॉलराइजेशन की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। गौरतलब है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले BRICS को “एंटी-अमेरिकन” बता चुके हैं और इसके सदस्यों पर टैरिफ लगाने की धमकी भी दे चुके हैं।

फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है। 2026 BRICS समिट में चर्चा और सहमति के बाद ही इसका भविष्य तय होगा, लेकिन इतना साफ है कि यह कदम वैश्विक भुगतान व्यवस्था और आर्थिक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

 

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