इंदौर के चर्चित भिक्षावृत्ति मामले में संपत्ति को लेकर विरोधाभासी दावे, कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश
Highlights
- इंदौर में ‘करोड़पति भिखारी’ कहे जा रहे मांगीलाल का मामला सुर्खियों में
- प्रशासन का दावा: कई मकान, ऑटो, कार और ब्याज पर पैसा देने का खुलासा
- परिजनों का पलटवार: “मांगीलाल भिखारी नहीं, वसूली के लिए जाते थे सराफा”
- भतीजे ने कहा– तीन मंजिला मकान मां के नाम, दस्तावेज मौजूद
- कलेक्टर बोले– सभी तथ्यों की जांच के बाद ही होगी कार्रवाई
विस्तार
इंदौर: इंदौर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत सामने आए तथाकथित ‘करोड़पति भिखारी’ मांगीलाल के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक ओर प्रशासन मांगीलाल को संपन्न व्यक्ति बताते हुए उसके पास कई मकान, ऑटो, कार और ब्याज पर पैसे देने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसके परिजनों ने इन दावों को गलत और भ्रामक बताया है। अब जिला प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की बात कही है।
प्रशासन का दावा: लाखों की संपत्ति और वाहन
महिला एवं बाल विकास विभाग की रेस्क्यू टीम के अनुसार, सराफा क्षेत्र में दिव्यांग बनकर भीख मांगने वाले मांगीलाल के पास—
- तीन पक्के मकान (एक तीन मंजिला भवन सहित)
- तीन ऑटो-रिक्शा, जो किराये पर चल रहे हैं
- एक कार
- सराफा बाजार में ब्याज पर दिया गया पैसा
अधिकारियों का कहना है कि मांगीलाल रोजाना 400–500 रुपये भीख से और 1000–2000 रुपये ब्याज से कमाता था। इसके बावजूद वह भिक्षावृत्ति करता रहा, जबकि शासन की ओर से उसे योजनाओं और रेड क्रॉस के माध्यम से 1BHK मकान भी उपलब्ध कराया गया था।
परिजनों का जवाब: भिखारी नहीं, गलतफहमी का शिकार
मांगीलाल के भतीजे ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “मेरे चाचा को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। जिस तीन मंजिला मकान की बात की जा रही है, वह मेरी मां के नाम दर्ज है। उसके लोन की किश्तें मैं खुद भरता हूं। हमारे पास सारे दस्तावेज मौजूद हैं।”
भतीजे का यह भी कहना है कि मांगीलाल सराफा बाजार में भीख मांगने नहीं, बल्कि ब्याज की रकम वसूलने जाया करते थे। चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण वे पहियों वाले तख्ते पर रहते थे, जिससे लोगों को भ्रम हुआ और उनकी तस्वीरें भिखारी के रूप में वायरल हो गईं।
कैसे सामने आया मामला
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब इंदौर प्रशासन ने शहर को भिखारी-मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया। सराफा क्षेत्र से मिली शिकायतों के आधार पर मांगीलाल को रेस्क्यू कर आश्रय गृह भेजा गया, जिसके बाद उसकी संपत्ति को लेकर दावे सामने आए।
प्रशासन का पक्ष: जांच जारी
भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मांगीलाल 2021–22 से भिक्षावृत्ति कर रहा था। वहीं कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया कि “सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा। बिना सत्यापन के कार्रवाई नहीं होगी।” कलेक्टर ने यह भी दोहराया कि इंदौर में भीख मांगना, भीख देना और भिखारियों से लेन-देन कानूनन प्रतिबंधित है।
एनजीओ की राय: मामला सिर्फ कानून का नहीं
भीख उन्मूलन के क्षेत्र में काम कर रही एनजीओ की अध्यक्ष रूपाली जैन का कहना है कि मांगीलाल का मामला केवल कानून का नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से भी जुड़ा है। उनके अनुसार, कुष्ठ रोग के कारण मांगीलाल सामाजिक उपेक्षा का शिकार हुआ और पुनर्वास उसके लिए बेहद कठिन हो गया।

