Saturday, February 14, 2026
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रांची में ईडी ऑफिस पर पुलिस की कार्रवाई: पेयजल विभाग क्लर्क से मारपीट केस की जांच में हड़कंप, नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

सदर डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने सुबह-सुबह ईडी दफ्तर में जांच शुरू की; संतोष कुमार की शिकायत पर दर्ज FIR

Highlights

  • पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार से मारपीट के आरोप में पुलिस ने ईडी कार्यालय में जांच की
  • डीएसपी सदर, सिटी डीएसपी, FSL टीम और एयरपोर्ट थाना प्रभारी मौके पर मौजूद
  • CISF की विशेष तैनाती, ईडी कार्यालय में सुरक्षा कड़ी
  • आरोपी क्लर्क ने ईडी पर दबाव बनाने और डंडे से पीटने का लगाया आरोप
  • मामले पर बाबूलाल मरांडी और संजय सेठ ने सरकार और पुलिस पर साधा निशाना
  • हाई कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेकर CBI जांच की मांग तेज

विस्तार

रांची(RANCHI)  पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार से कथित मारपीट के मामले ने झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक हलचल को तेज कर दिया है। गुरुवार सुबह रांची पुलिस की एक बड़ी टीम एयरपोर्ट रोड स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) कार्यालय पहुंची और जांच शुरू कर दी। इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में नए सियासी तनाव को जन्म दे दिया है।

पुलिस टीम ने की ईडी ऑफिस की तलाशी

पुलिस टीम ने ईडी कार्यालय में पहुंचकर विस्तृत तलाशी अभियान चलाया। जांच टीम में सदर डीएसपी (टीम लीडर), सिटी डीएसपी, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की विशेषज्ञ टीम और एयरपोर्ट थाना प्रभारी शामिल थे।

जांच शुरू होते ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए ईडी कार्यालय के बाहर CISF के अतिरिक्त जवान तैनात कर दिए गए, ताकि तलाशी प्रक्रिया बिना किसी व्यवधान के पूरी की जा सके।

कौन हैं शिकायतकर्ता संतोष कुमार?

संतोष कुमार, पेयजल विभाग में क्लर्क हैं। उन्होंने FIR में आरोप लगाया है कि

  • 12 जनवरी को ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया,
  • दो अधिकारियों ने दबाव बनाकर जुर्म कबूलने को कहा,
  • इनकार करने पर डंडे से बेरहमी से मारपीट की,
  • गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया।

इस शिकायत के आधार पर एयरपोर्ट थाना में FIR दर्ज हुई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।

राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

ईडी ऑफिस पर हुई इस कार्रवाई ने सियासी तकरार को और बढ़ा दिया है।

बाबूलाल मरांडी की प्रतिक्रिया

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड हाई कोर्ट को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार घोटालेबाजों को बचाने में जुटी है, जबकि पुलिस ईडी के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाने का काम कर रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य सरकार स्पष्ट करे कि DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति आखिर किस नियम के तहत की गई है।

केंद्रीय मंत्री संजय सेठ का बयान

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस घटना को झारखंड का “काला अध्याय” करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि झारखंड हाई कोर्ट को तत्काल हस्तक्षेप कर मामले की सीबीआई जांच करानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया, “18 महीने जेल में रह चुका एक घोटालेबाज झूठी FIR दर्ज करता है और पुलिस बिना देर किए ईडी कार्यालय पहुँच जाती है।”

संजय सेठ ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर पुलिस अपराध नियंत्रण में भी इतनी ही तेजी दिखाए तो झारखंड में क्राइम बढ़े ही नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड को वेस्ट बंगाल मॉडल की ओर धकेला जा रहा है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की नीति जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट करप्शन पर आधारित है।

 

 

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