Friday, March 6, 2026
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इसरो ने रचा इतिहास: LVM3-M6 मिशन से अमेरिकी ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च, भारत की वैश्विक ताकत और मजबूत

 हरिकोटा से LVM3-M6 की सफल उड़ान, 6100 किलोग्राम के सबसे भारी LEO पेलोड के साथ इसरो ने वैश्विक कमर्शियल स्पेस सेक्टर में बढ़ाया भारत का कद

Highlights:

  • इसरो ने LVM3-M6 मिशन के तहत अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile का सैटेलाइट लॉन्च किया
  • हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55:30 बजे सफल प्रक्षेपण
  • ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ का वजन करीब 6100 किलोग्राम, LEO में अब तक का सबसे भारी पेलोड
  • यह पूरी तरह से कमर्शियल लॉन्च, NSIL और AST SpaceMobile के करार के तहत
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो की ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की
  • दूरदराज इलाकों में 4G-5G मोबाइल कनेक्टिविटी का रास्ता खुलेगा
  • वैश्विक सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में भारत की भूमिका और मजबूत

विस्तार:

हरिकोटा से ऐतिहासिक उड़ान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से बुधवार सुबह 8 बजकर 55 मिनट 30 सेकेंड पर LVM3-M6 रॉकेट के जरिए अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के संचार उपग्रह ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ का सफल प्रक्षेपण किया गया। यह प्रक्षेपण दूसरे लॉन्च पैड से किया गया।

अब तक का सबसे भारी LEO पेलोड

इस संचार उपग्रह का वजन लगभग 6100 किलोग्राम है। इसरो के अनुसार, यह LVM3 रॉकेट के जरिए पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित किया जाने वाला अब तक का सबसे भारी पेलोड है। प्रक्षेपण से पहले 24 घंटे की उलटी गिनती मंगलवार को शुरू हुई थी और मिशन पूरी तरह सफल रहा।

प्रधानमंत्री ने की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत के लिए गर्व का क्षण बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह सफल प्रक्षेपण भारत की भारी-भरकम लॉन्च क्षमता को मजबूत करता है और वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी।

क्या है इस मिशन का उद्देश्य

LVM3-M6 मिशन एक फुली कमर्शियल लॉन्च है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की कमर्शियल स्पेस सेक्टर में पकड़ को और मजबूत करना है। ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ सैटेलाइट के जरिए दुनिया के उन इलाकों में भी मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाते।

बिना टावर भी मिलेगा 4G-5G नेटवर्क

इस सैटेलाइट की खास बात यह है कि यह सीधे स्मार्टफोन को सैटेलाइट से जोड़ने में सक्षम होगा। इससे यूजर्स को मोबाइल टावर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूरदराज, पहाड़ी, समुद्री और कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी 4G और 5G वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, मैसेजिंग और इंटरनेट सेवा संभव हो सकेगी।

AST SpaceMobile की बड़ी योजना

AST SpaceMobile पहले ही ‘ब्लूबर्ड-1 से 5’ सैटेलाइट लॉन्च कर चुकी है। कंपनी का दावा है कि उसने दुनियाभर के 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी की है। इसका लक्ष्य वैश्विक स्तर पर डायरेक्ट-टू-सेलफोन कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है, जिससे डिजिटल असमानता को कम किया जा सके।

ISRO–NSIL और AST का करार

इसरो के अनुसार, यह लॉन्च न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और AST SpaceMobile के बीच हुए समझौते के तहत किया गया है। NSIL, ISRO की कमर्शियल शाखा है, जो भारत के वाणिज्यिक प्रक्षेपण अभियानों को संभालती है।

तकनीकी खूबियां

LVM3 एक तीन-चरणीय रॉकेट है, जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा है। इसमें दो S200 ठोस रॉकेट बूस्टर हैं, जो लॉन्च के समय अत्यधिक थ्रस्ट प्रदान करते हैं। प्रक्षेपण के करीब 15 मिनट बाद ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ के रॉकेट से अलग होने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।

भारत की अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक

यह मिशन इस बात का प्रमाण है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अंतरिक्ष तकनीक और कमर्शियल लॉन्चिंग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। LVM3-M6 की सफलता न केवल इसरो की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि भारत को वैश्विक स्पेस मार्केट में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करती है।

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