जेल से सोशल मीडिया के जरिए माफिया और सरगनाओं द्वारा आपराधिक गतिविधियों की खबरों पर हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी
हाइलाइट्स:
• माफिया व अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया से अपराध संचालन की खबरें
• हाईकोर्ट ने स्थिति को बताया शर्मनाक और चिंताजनक
• राज्य सरकार को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश
• मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को
• मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ की टिप्पणी
विस्तार:
झारखंड राज्य की विभिन्न जेलों में सामने आए ‘नाच प्रकरण’ और इसके बाद सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से माफिया एवं अपराध सरगनाओं द्वारा आपराधिक गतिविधियों के संचालन से जुड़ी खबरों को झारखंड उच्च न्यायालय ने बेहद गंभीरता से लिया है। समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “यह स्थिति राज्य की एजेंसियों के लिए न केवल शर्मनाक है, बल्कि अत्यंत चिंताजनक भी है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि जेलों के अंदर से यदि आपराधिक नेटवर्क संचालित हो रहे हैं, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
6 जनवरी 2026 को होगी विस्तृत सुनवाई
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 6 जनवरी 2026 की तिथि निर्धारित की है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि जेलों में इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की क्या कार्ययोजना है।
