झारखंड में नगर निकाय चुनाव से पहले आरक्षण सूची ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल, बीजेपी और कांग्रेस चुनावी मोड में
Highlights:
- झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में
- आरक्षण सूची निर्वाचन आयोग को भेजी गई
- चुनाव भले गैर-दलगत हों, लेकिन दलों की सक्रियता तेज
- बीजेपी और कांग्रेस ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कीं
- आरक्षण अधिसूचना के बाद मुकाबला और रोचक होने की संभावना
विस्तार :
झारखंड में नगर निकाय चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। भले ही अभी चुनाव की औपचारिक घोषणा नहीं हुई हो, लेकिन आरक्षण सूची निर्वाचन आयोग को भेजे जाने के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की राजनीति में नगर निकाय चुनाव को लेकर हलचल साफ तौर पर देखी जा रही है।
आरक्षण सूची बनी सियासी चर्चा का केंद्र
वार्ड सदस्य और मेयर पद के लिए आरक्षण की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन संभावित आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही कई दावेदार मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
बीजेपी चुनावी मोड में
भारतीय जनता पार्टी ने नगर निकाय चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी संभावित उम्मीदवारों को आगे बढ़ा रही है और संगठन स्तर पर समर्थन भी दिया जा रहा है। बीजेपी का कहना है कि जैसे ही आरक्षण की अधिसूचना जारी होगी, चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।
कांग्रेस ने भी कसी कमर
वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी नगर निकाय चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने वार्ड स्तर पर कमेटियों का गठन कर लिया है और अध्यक्षों की नियुक्ति भी की जा चुकी है। कांग्रेस का दावा है कि वह पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।
झामुमो-कांग्रेस में समन्वय, बीजेपी अकेले मैदान में
नगर निकाय चुनाव की आहट के साथ ही झारखंड की राजनीति में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। वार्ड से लेकर मेयर तक की कुर्सी पर सभी की नजरें टिकी हैं। झामुमो और कांग्रेस के बीच समन्वय साफ नजर आ रहा है, जबकि बीजेपी अपने दम पर चुनावी मुकाबले की तैयारी कर रही है।
आरक्षण अधिसूचना के बाद बढ़ेगा रोमांच
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही आरक्षण की अधिसूचना जारी होगी, मुकाबला और दिलचस्प हो जाएगा। तब यह साफ होगा कि शहरों की सत्ता पर किस राजनीतिक ताकत का कब्जा होता है।
