पश्चिम एशिया में बदली भारत की छवि, पीएम मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति ने खाड़ी देशों के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई पर पहुंचाया
Highlights:
- 2014 के बाद भारत–खाड़ी संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव
- पीएम मोदी के 15 जीसीसी दौरे, किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री से अधिक
- छह में से पांच खाड़ी देशों ने दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान
- ओमान ने हाल ही में ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से किया सम्मानित
- भारत अब केवल श्रम और तेल का साझेदार नहीं, रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित
विस्तार :
बदला हुआ भारत–खाड़ी रिश्ता
भारत का खाड़ी देशों के साथ जुड़ाव पिछले एक दशक में तेजी से बदला है। इस बदलाव के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सक्रिय और व्यक्तिगत कूटनीति रही है। वर्ष 2014 के बाद से भारत ने पश्चिम एशिया में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे भारत–खाड़ी संबंधों के इतिहास में अभूतपूर्व मानी जा रही हैं।
हाइड्रोकार्बन से आगे रणनीतिक साझेदारी
पहले जहां भारत–खाड़ी संबंध मुख्य रूप से हाइड्रोकार्बन आयात और भारतीय श्रमिकों तक सीमित थे, वहीं अब यह साझेदारी एक संस्थागत, दीर्घकालिक और राजनीतिक रूप से आत्मविश्वासी संबंध में बदल चुकी है। दोनों पक्ष अब निवेश, रक्षा, डिजिटल सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और भू-राजनीतिक संतुलन जैसे क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी के रिकॉर्ड 15 खाड़ी दौरे
प्रधानमंत्री मोदी ने अब तक जीसीसी देशों के 15 दौरे किए हैं, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा किए गए दौरों में सर्वाधिक हैं। इन यात्राओं ने खाड़ी नेतृत्व के साथ एक ऐसा व्यक्तिगत और भरोसेमंद रिश्ता बनाया है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में देखने को नहीं मिला।
सर्वोच्च नागरिक सम्मान: विश्वास की मुहर
भारत के प्रति बढ़ते भरोसे की सबसे बड़ी मिसाल तब सामने आई जब छह में से पांच जीसीसी देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किए। हाल ही में ओमान ने उन्हें ऑर्डर ऑफ ओमान देकर इस सूची में शामिल किया।
किन देशों से मिले सम्मान
- सऊदी अरब (2016): किंग अब्दुलअज़ीज़ सैश
- यूएई (2019): ऑर्डर ऑफ ज़ायद
- बहरीन (2019): किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रिनेसेंस (फर्स्ट क्लास)
- कुवैत (2024): ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर
- ओमान (2025): ऑर्डर ऑफ ओमान
सिर्फ प्रतीक नहीं, रणनीतिक संदेश
खाड़ी क्षेत्र में ऐसे सम्मान केवल उन्हीं नेताओं को दिए जाते हैं, जिन्हें विश्वसनीय, भरोसेमंद और रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी पांच जीसीसी देशों से शीर्ष सम्मान पाने वाले पहले वैश्विक नेता हैं। यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व पर गहरे भरोसे को दर्शाते हैं।
आशंकाओं को पीछे छोड़ती कूटनीति
2014 से पहले कई विशेषज्ञों का मानना था कि पश्चिम एशिया भारत के लिए जटिल और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहेगा। लेकिन पीएम मोदी ने हर खाड़ी देश के साथ व्यक्तिगत नेतृत्व स्तर पर मजबूत संबंध बनाकर इन आशंकाओं को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।
खाड़ी नेतृत्व के साथ मजबूत व्यक्तिगत रिश्ते
यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद, सऊदी नेतृत्व, बहरीन, कुवैत, ओमान और कतर के शासकों के साथ प्रधानमंत्री मोदी के संबंध आपसी विश्वास और खुले संवाद पर आधारित बताए जाते हैं। यह स्तर किसी विदेशी नेता को शायद ही देखने को मिलता है।
ऐतिहासिक सफलता की ओर भारत
पूरे खाड़ी क्षेत्र में आज भारत को एक स्थिर, भरोसेमंद और अनिवार्य रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। यह बदलाव अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक कूटनीतिक पुनर्निर्माण का संकेत है। अब खाड़ी देशों की ‘पूर्व की ओर दृष्टि’ में भारत केंद्र में है, न कि हाशिये पर।
