रांची में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण, मोरहाबादी में सामूहिक गायन का आयोजन
Highlights :
- मोराबादी मैदान में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन
- आयोजन में रांची विधायक चंदेश्वर प्रसाद सिंह समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल
- स्वदेशी अपनाने और विदेशी वस्तुओं को त्यागने का संकल्प दिलाया गया
- पूरे प्रदेश में 7 से 15 नवंबर तक ‘वंदे मातरम्’ उत्सव का आयोजन
विस्तार :
रांची- राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से मोरहाबादी स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया इस मौके पर रांची के विधायक चंदेश्वर प्रसाद सिंह, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
स्वदेशी को अपनाने का संकल्प
विधायक चंदेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि “राष्ट्र निर्माण में स्वदेशी का योगदान अतुलनीय है। हमें विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाना चाहिए।” उन्होंने उपस्थित लोगों को स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और आत्मनिर्भरता का संकल्प भी दिलाया।
प्रदेश भर में 7 से 15 नवंबर तक उत्सव
भाजपा ने घोषणा की है कि 7 नवंबर से 15 नवंबर तक पूरे प्रदेश में ‘वंदे मातरम् उत्सव’ मनाया जाएगा। इस दौरान हर जिला मुख्यालय में सामूहिक गायन और जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
वंदे मातरम् : इतिहास और महत्व
- 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने गीत की रचना की
- यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बना
- 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका पहला सार्वजनिक पाठ किया
- 1950 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया
वंदे मातरम् का 150वां वर्ष सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, कर्तव्य और एकता के भाव को फिर से जीवंत करने का अवसर माना जा रहा है।
