रांची: झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। यह मामला फणिन्द्र मंडल एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के रूप में दर्ज है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उनके ऑनलाइन आवेदन केवल इस आधार पर खारिज कर दिए गए कि उनके जीवनसाथी सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने तर्क दिया कि विभाग का यह निर्णय पूर्णतः मनमाना और अवैध है। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि प्रशासन द्वारा जारी परिपत्र संख्या 1607 दिनांक 06 जुलाई 2023 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि यदि जीवनसाथी संविदा पर भी कार्यरत हों, तो उन्हें भी स्पाउसल ट्रांसफर की श्रेणी में स्थानांतरण का लाभ दिया जाएगा। इसके बावजूद विभाग ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन अस्वीकार कर दिए, जो नियमों का उल्लंघन है।
माननीय न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में काउंटर एफिडेविट दाखिल करे।