नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। जहां एनडीए ने पहले ही अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया था, वहीं अब विपक्ष ने भी बड़ा दांव खेलते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रेड्डी का नाम घोषित कर दिया है। लंबे मंथन और कई दौर की बैठकों के बाद विपक्षी खेमे ने साफ कर दिया है कि इस बार उनकी रणनीति राजनीति से अलग रास्ता अपनाने की है।
विपक्ष की रणनीति
विपक्षी दलों का मानना है कि इस चुनाव में उन्हें ऐसा चेहरा उतारना चाहिए, जिसकी छवि बेदाग हो और जो राजनीति से जुड़ा न होकर समाज और न्यायपालिका से आया हो। यही कारण है कि पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रेड्डी को उम्मीदवार बनाने पर सहमति बनी।
क्यों खास है यह नाम?
दक्षिण भारत से उम्मीदवार लाने की DMK की मांग को पूरा किया गया।
TMC की शर्त थी कि चेहरा गैर-राजनीतिक हो, जिसे यह नाम पूरा करता है।
कांग्रेस और अन्य दलों की इच्छा थी कि चेहरा सर्वमान्य हो।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस नाम का समर्थन जताकर विपक्षी एकजुटता को और मजबूत किया।
एनडीए के लिए मुश्किल समीकरण
विपक्ष का यह कदम एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। खासकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की पार्टियाँ — TDP, YSRCP और BRS — अब दुविधा में पड़ सकती हैं कि वे किस पक्ष का समर्थन करें। विपक्ष का कहना है,
“एनडीए के पास संघ से जुड़ा चेहरा है, जबकि हमारे पास सुप्रीम कोर्ट से आया निष्पक्ष चेहरा।”
नतीजा चाहे जो भी, लेकिन…
संख्याबल को देखते हुए नतीजा पहले से तय माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष की यह चाल उन्हें नैतिक बढ़त दिलाती दिख रही है। यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं बल्कि छवि और संदेश की राजनीति का भी प्रतीक बनता जा रहा है।
