चार हफ्ते में जवाब तलब, ‘गौ उपकर’ के उपयोग पर भी कोर्ट ने उठाए सवाल
Highlights:
👉 सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और NHAI को नोटिस जारी किया
👉 हाइवे पर आवारा मवेशियों से बढ़ते हादसों पर चिंता
👉 ‘गौ उपकर’ के प्रभावी उपयोग पर उठाए सवाल
👉 राष्ट्रीय स्तर पर गाइडलाइन बनाने की मांग
👉 फेंसिंग और गौशालाओं की व्यवस्था पर जोर
विस्तार:
देशभर के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर आवारा मवेशियों के कारण बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड और NHAI को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने जताई चिंता
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि कई राज्य सरकारें ‘गौ उपकर’ के नाम पर 10 प्रतिशत तक टैक्स वसूल रही हैं, लेकिन इसका जमीनी स्तर पर प्रभाव नजर नहीं आ रहा है।
PIL पर हो रही सुनवाई
यह मामला ‘लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल’ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुना जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि हाइवे पर आवारा मवेशियों की घुसपैठ रोकने के लिए देशभर में एक समान गाइडलाइन बनाई जाए।
फेंसिंग और सख्त कार्रवाई की मांग
याचिका में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में अनिवार्य फेंसिंग लगाने, वैज्ञानिक तरीके से गौशालाएं और पशु आश्रय गृह विकसित करने तथा मवेशियों को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है।
सरकारों से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि हाइवे को पशु-मुक्त बनाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। साथ ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद अब केंद्र और राज्य सरकारों पर सड़क सुरक्षा के इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।
