Tuesday, April 7, 2026
Homeखबर स्तम्भबोकारो में बड़े आंदोलन की तैयारी! चंपई सोरेन बोले -“हम लड़ेंगे, हम...

बोकारो में बड़े आंदोलन की तैयारी! चंपई सोरेन बोले -“हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे”

X पोस्ट से गरमाई सियासत, विस्थापितों के मुद्दे पर सरकार और BSL को फिर चेतावनी

Highlights:

👉 चंपई सोरेन का X पोस्ट, बोकारो दौरे का ऐलान
👉 विस्थापितों के समर्थन में बड़े आंदोलन की तैयारी
👉 सरकार और BSL को पहले दे चुके हैं अल्टीमेटम
👉 नौकरी-मुआवजा नहीं मिला तो जमीन पर हल चलाने की चेतावनी
👉 34,000 एकड़ जमीन अधिग्रहण पर उठाए सवाल

विस्तार

झारखंड की राजनीति में बोकारो विस्थापन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है।

अपने पोस्ट में उन्होंने बताया कि वह इसी सप्ताह बोकारो के विभिन्न गांवों का दौरा कर विस्थापितों से मिलेंगे। उन्होंने लिखा—
“टाटा स्टील मजदूर आंदोलन, यूसीआईएल विस्थापित आंदोलन, ईचा खरकाई डैम में 84 गांव बचाने और नगड़ी में 227 एकड़ जमीन बचाने जैसे कई सफल आंदोलनों के बाद अब बारी बोकारो की है। फिर एक बार… हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे।”

चंपई सोरेन ने संकेत दिया कि बोकारो, घाटो, ललपनिया, गोमिया और पूरे कोयलांचल क्षेत्र में विस्थापितों की समस्याओं को लेकर व्यापक आंदोलन की तैयारी चल रही है।

पहले ही दे चुके हैं अल्टीमेटम
इससे पहले उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए राज्य सरकार और बोकारो स्टील प्लांट (BSL) प्रबंधन को डेढ़ महीने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर अप्रेंटिसशिप पूरा कर चुके युवाओं को नौकरी नहीं मिली और विस्थापितों की समस्याएं दूर नहीं हुईं, तो लोग खाली पड़ी जमीन पर हल चलाने को मजबूर होंगे।

34,000 एकड़ जमीन पर सवाल
चंपई सोरेन ने कहा कि 1960 के दशक में BSL के लिए लगभग 34,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा अब भी खाली पड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस जमीन को रैयतों को वापस क्यों नहीं किया जा रहा।

उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 24(2) का हवाला देते हुए कहा कि जहां मुआवजा या कब्जा पूरा नहीं हुआ, वहां अधिग्रहण स्वतः समाप्त माना जाना चाहिए।

बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोग
उन्होंने आरोप लगाया कि 64 मौजों के लोग आज भी पानी, बिजली, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई गांव सरकारी रिकॉर्ड से भी बाहर हैं, जिससे लोगों को जरूरी दस्तावेज तक नहीं मिल पाते।

जमीन उपयोग पर भी सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जब क्षेत्र नगर निकाय के दायरे में नहीं आता, तो वहां मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की अनुमति कैसे दी गई। उन्होंने इसकी जांच की मांग की है।

राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
चंपई सोरेन ने साफ कहा कि अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन बोकारो तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे झारखंड में फैल सकता है।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर राज्य सरकार और BSL प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस बयान के बाद हलचल तेज हो गई है।

 

RELATED ARTICLES

Most Popular