मेडिका अस्पताल में बकाया राशि के कारण रुका शव, हस्तक्षेप के बाद रिम्स भेजा गया
Highlights:
👉 बकाया राशि के कारण शव सौंपने में देरी
👉 परिजनों को करना पड़ा भारी परेशानी का सामना
👉 जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया हस्तक्षेप
👉 शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा गया
👉 मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

विस्तार:
रांची: रामनवमी जुलूस के दौरान हुई हिंसक घटना में मृतक गुलाब कुमार साव के शव को लेकर परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह घटना कल की है, जब रांची के एक निजी अस्पताल (मेडिका) में इलाज के दौरान करीब 2.38 लाख रुपये बकाया होने के कारण अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव सौंपने में देरी की जा रही थी।
इस संवेदनशील स्थिति में परिजनों की मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं। मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद स्थिति को संभालने का प्रयास शुरू हुआ।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शांतनु मिश्रा की भूमिका विशेष रूप से सक्रिय और निर्णायक रही। परिजनों की परेशानी की जानकारी मिलते ही शांतनु मिश्रा तत्काल अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से वार्ता कर शव परिजनों को सौंपने की मांग की, लेकिन समाधान में देरी होने पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया।
बताया जाता है कि मानवीय आधार पर कार्रवाई करते हुए शांतनु मिश्रा ने पहल करते हुए अस्पताल के शवगृह का ताला खुलवाया/तोड़कर शव को बाहर निकलवाया, ताकि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। उनके इस कदम से लंबे समय से अटकी प्रक्रिया को गति मिली और परिजनों को राहत मिली।
इस दौरान उनके साथ युवा जिला कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष रिंकू कुमार और बक्शीडीह निवासी दिनेश पासवान भी सक्रिय रूप से मौजूद रहे और पूरे मामले को सुलझाने में सहयोग किया।
मिली जानकारी के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स (RIMS) रांची भेजा गया, जहां प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और संवेदनशील मामलों में मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
