Sunday, March 29, 2026
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रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का निधन, आज 3 बजे होगा अंतिम संस्कार

Highlights

  • 87 साल की उम्र में मुंबई में निधन
  • पद्म भूषण से थे सम्मानित
  • आज दोपहर 3 बजे चंदनवाड़ी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार
  • रेमंड को ग्लोबल ब्रांड बनाने में अहम भूमिका
  • एविएशन और एडवेंचर में भी बनाए कई रिकॉर्ड

विस्तार:

भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज और रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे और रेमंड ग्रुप के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की। इस खबर के सामने आते ही उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, विजयपत सिंघानिया का अंतिम संस्कार आज यानी रविवार को दोपहर 3 बजे मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान घाट में किया जाएगा। इससे पहले दोपहर 1:30 बजे एलडी रुपारेल मार्ग स्थित हवेली में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी, जहां लोग उन्हें अंतिम विदाई दे सकेंगे।

विजयपत सिंघानिया को एक दूरदर्शी उद्योगपति के रूप में जाना जाता था। उन्होंने 1980 में रेमंड ग्रुप की कमान संभाली और करीब दो दशकों तक कंपनी का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में रेमंड ने न सिर्फ देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कंपनी को एक मॉडर्न इंडस्ट्रियल ग्रुप के रूप में स्थापित किया।

रेमंड की शुरुआत भले ही 1925 में हुई थी, लेकिन विजयपत सिंघानिया के दौर में कंपनी ने तेजी से विस्तार किया। 1986 में ‘पार्क एवेन्यू’ जैसे प्रीमियम ब्रांड लॉन्च किए गए और 1990 में ओमान में पहला अंतरराष्ट्रीय शोरूम खोला गया। इसके अलावा कंपनी ने टेक्सटाइल के साथ इंजीनियरिंग और एविएशन सेक्टर में भी कदम रखा।

विजयपत सिंघानिया सिर्फ उद्योगपति ही नहीं, बल्कि एक साहसी और रोमांचप्रिय व्यक्ति भी थे। वे एक प्रशिक्षित पायलट थे और उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। 1988 में उन्होंने माइक्रोलाइट विमान से लंदन से नई दिल्ली तक अकेले उड़ान भरी। वहीं 2005 में 67 वर्ष की उम्र में हॉट एयर बैलून से करीब 69,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया।

उनके योगदान के लिए उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया। साथ ही उन्हें ‘तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड’ भी मिला। भारतीय वायुसेना ने उन्हें ‘मानद एयर कमोडोर’ की उपाधि भी दी थी और वे मुंबई के शेरिफ भी रह चुके थे।

विजयपत सिंघानिया ने 2015 में अपनी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी थी, जिसके बाद कंपनी की कमान पूरी तरह उनके हाथों में आ गई। हालांकि, इसके बाद पिता-पुत्र के बीच संपत्ति को लेकर विवाद भी सामने आया, जो काफी चर्चा में रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विजयपत सिंघानिया अपने पीछे करीब 12 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़ गए हैं। उनके निधन को भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

परिवार ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व, समाजसेवी और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उनकी सोच और कार्य आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।

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