कहा– मनरेगा ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा, VB-GRAM कानून से अधिकार कमजोर होने की आशंका
Highlights:
- विधानसभा में मनरेगा को लेकर दीपिका पांडे सिंह की मांग
- रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 करने की अपील
- VB-GRAM अधिनियम 2025 पर जताई चिंता
- ग्रामीण गरीबों, महिलाओं और मजदूरों के हितों की बात
- केंद्र से पूर्ववत वित्तीय जिम्मेदारी निभाने की मांग
विस्तार
विधानसभा में मनरेगा को लेकर उठी मांग
झारखंड विधानसभा में विधायक दीपिका पांडे सिंह ने मनरेगा को लेकर महत्वपूर्ण मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मनरेगा वर्ष 2005 से लागू होने के बाद से ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा साबित हुआ है।
रोजगार के दिनों को बढ़ाने की मांग
दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि राज्य के गरीब परिवारों को अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा के तहत रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 दिन की जानी चाहिए। इससे लाखों परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा।
VB-GRAM अधिनियम पर चिंता
उन्होंने प्रस्तावित VB-GRAM अधिनियम 2025 को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर हो सकती है, राज्यों पर 60:40 का वित्तीय बोझ बढ़ सकता है और ग्राम सभाओं की शक्तियां कम हो सकती हैं।
डिजिटल जटिलताओं से श्रमिकों पर असर
दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि डिजिटल प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण कई श्रमिक योजनाओं से वंचित हो सकते हैं, जो चिंताजनक है।
केंद्र से जिम्मेदारी निभाने की मांग
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा के तहत पूर्व की तरह वित्तीय जिम्मेदारी निभाई जाए और योजना के अधिकार-आधारित स्वरूप को बनाए रखा जाए।
गरीबों के हितों की सुरक्षा पर जोर
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन, पलायन रोकने और महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई है, इसलिए इसके मूल स्वरूप को बनाए रखना जरूरी है।
