भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के बैनर तले हुआ आंदोलन, राष्ट्रपति के नाम प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
Highlights
- गिरिडीह जिला मुख्यालय में भारत मुक्ति मोर्चा का धरना
- जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर प्रदर्शन
- ओबीसी जातियों का कॉलम शामिल करने की उठी मांग
- एससी-एसटी-ओबीसी हित में यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग
- मांगें नहीं मानी गईं तो 23 मार्च को रैली और 23 अप्रैल को भारत बंद की चेतावनी

विस्तार
गिरिडीह। जाति आधारित जनगणना समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को गिरिडीह जिला मुख्यालय में भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के बैनर तले धरना-प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन भारत मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार पटवा के नेतृत्व में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संगठन के राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के तहत किया गया।
जाति आधारित जनगणना की मांग
धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना कराने का फैसला लिया था, लेकिन जनगणना अधिसूचना में ओबीसी जातियों का कॉलम शामिल नहीं किया गया। वक्ताओं ने इसे पिछड़े वर्गों के साथ धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि आगामी राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी समेत सभी जातियों का अलग कॉलम शामिल किया जाना चाहिए, ताकि समाज के वास्तविक आंकड़े सामने आ सकें।
अन्य मांगें भी उठाईं
प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान कई अन्य मांगें भी उठाईं। इनमें प्रमुख रूप से
- एससी, एसटी और ओबीसी के हित में सख्त यूजीसी रेगुलेशन लागू करना
- वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से मुक्त करना
जैसी मांगें शामिल हैं।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा और मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संगठन के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो 23 मार्च को रैली और 23 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया जाएगा।
कई कार्यकर्ता रहे मौजूद
धरना-प्रदर्शन में भीखी राम पासवान, जयनारायण दास, संतोष प्रसाद यादव, रामदेव रविदास, प्रकाश दास, अरविंद नागवंशी, राजेश दास, भीखन यादव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
