1818 से चली आ रही परंपरा; पुरी की तर्ज पर भव्य आयोजन,संस्कृति की अनोखी झलक
Highlights
- 2 मार्च 2026 को निकलेगी ऐतिहासिक दोल यात्रा
- 1818 से चली आ रही परंपरा
- सुसज्जित पालकी में नगर भ्रमण करेंगे राधा-कृष्ण
- पुरी की तर्ज पर धार्मिक अनुष्ठान
- पूरे नगर में भजन-कीर्तन और भक्तिमय माहौल
विस्तार
सरायकेला-खरसावां। झारखंड की सांस्कृतिक धरोहरों में शुमार सरायकेला की ऐतिहासिक दोल यात्रा 2 मार्च 2026 को भव्य रूप में निकाली जाएगी। वर्ष 1818 से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
होली के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी विशेष सुसज्जित पालकी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं भक्तों के घर-घर पहुंचकर आशीर्वाद देते हैं और उनके साथ गुलाल की होली खेलते हैं।
उत्कल संस्कृति की अनोखी झलक
यह आयोजन ओड़िशा के पुरी की तर्ज पर किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दोल यात्रा निकाली जाती है।
उत्कल संस्कृति की छाप इस यात्रा में स्पष्ट दिखाई देती है
- पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन
- भजन-कीर्तन की गूंज
- श्रद्धालुओं की विशाल भागीदारी
- रंग-गुलाल और फूलों की वर्षा
पूरे नगर में भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
सांस्कृतिक विरासत की पहचान
सरायकेला की होली पूरे झारखंड में अपने विशिष्ट पारंपरिक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है।
यह दोल यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। स्थानीय लोग इसे अपनी विरासत का गौरव मानते हैं।
घर-घर पहुंचेंगे राधा-कृष्ण
दोल यात्रा के दौरान भगवान की पालकी नगर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरती है। श्रद्धालु अपने घरों के बाहर—
- रंगोली
- फूल-मालाएं
- अबीर-गुलाल
से स्वागत की तैयारी करते हैं।
भक्तों का विश्वास है कि इस दिन भगवान के दर्शन और आशीर्वाद से सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
