अजय राय बोले कंपनी अधिनियम के तहत हर चार माह में बैठक अनिवार्य; लंबित एजेंडों से प्रभावित हो सकती है राज्य की बिजली व्यवस्था
Highlights
- 23 सितंबर 2025 के बाद नहीं हुई बोर्ड बैठक
- कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 173(1) का हवाला
- वितरण, संचरण और उत्पादन से जुड़े फैसले लंबित
- दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माने की आशंका
- 9 मार्च 2026 को प्रस्तावित बैठक कराने की मांग
विस्तार
रांची। झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने झारखंड राज्य ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) और उसकी अनुषंगी कंपनियों में लंबे समय से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक नहीं होने पर गंभीर चिंता जताई है।
उन्होंने बताया कि 23 सितंबर 2025 के बाद से अब तक बोर्ड की कोई बैठक आयोजित नहीं की गई है। यह मामला
- Jharkhand Urja Vikas Nigam Limited (JUVNL)
- Jharkhand Bijli Vitran Nigam Limited (JBVNL)
- Jharkhand Urja Sancharan Nigam Limited (JUSNL)
- Jharkhand Urja Utpadan Nigam Limited (JUUNL)
से जुड़ा हुआ है।
कंपनी अधिनियम का उल्लंघन?
अजय राय ने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 173(1) के अनुसार प्रत्येक चार माह में कम से कम एक बोर्ड बैठक आयोजित करना अनिवार्य है। उन्होंने इसे न केवल कानूनी दायित्व बताया, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन की बुनियादी शर्त भी करार दिया।
कई अहम एजेंडे लंबित
संघ के अनुसार बैठक नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं, जिनमें—
- बिजली वितरण से जुड़े नीतिगत फैसले
- संचरण (Transmission) परियोजनाएं
- उत्पादन (Generation) से संबंधित योजनाएं
- वित्तीय अनुमोदन और बजट निर्णय
शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे निगम के कामकाज और राज्य की विद्युत व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
दंडात्मक कार्रवाई की आशंका
अजय राय ने चेतावनी दी कि यदि समय पर बोर्ड बैठक नहीं बुलाई गई तो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) द्वारा दंडात्मक कार्रवाई, जुर्माना और कंपनी के निर्णयों की वैधता पर प्रश्न उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल निगम की साख प्रभावित होगी, बल्कि कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हितों पर भी असर पड़ेगा।
9 मार्च की बैठक हर हाल में हो
श्रमिक संघ ने सरकार और निगम प्रबंधन से मांग की है कि 9 मार्च 2026 को प्रस्तावित बोर्ड बैठक हर हाल में आयोजित की जाए और लंबित एजेंडों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। अजय राय ने कहा “ऊर्जा क्षेत्र राज्य के विकास की रीढ़ है। इसमें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता स्वीकार्य नहीं है।”
आगे की रणनीति की चेतावनी
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द बैठक नहीं बुलाई गई तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेगा।

