Thursday, February 26, 2026
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जमशेदपुर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, श्री जगन्नाथ मंदिर का शिलान्यास; सादगी ने जीता दिल

कदमा में 100 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य मंदिर परिसर, बारीडीह में 150 कदम पैदल चलकर बच्चों को बांटी चॉकलेट

Highlights

  • सोनारी एयरपोर्ट पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने किया स्वागत
  • कदमा मरीन ड्राइव के पास श्री जगन्नाथ मंदिर का भूमि पूजन
  • 2.5 एकड़ में बनेगा मंदिर व आध्यात्मिक-सांस्कृतिक केंद्र
  • चार वर्षों में मंदिर निर्माण का लक्ष्य
  • बारीडीह में राष्ट्रपति ने पैदल चलकर बच्चों से की मुलाकात
  • मेडिकल कॉलेज में भी कार्यक्रम में लिया हिस्सा

विस्तार

जमशेदपुर- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को जमशेदपुर पहुंचीं। सोनारी एयरपोर्ट पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका औपचारिक स्वागत किया।

एयरपोर्ट से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राष्ट्रपति सड़क मार्ग से कदमा स्थित कार्यक्रम स्थल पहुंचीं, जहां श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुईं।

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर श्री जगन्नाथ मंदिर की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में ट्रस्ट के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

100 करोड़ की लागत से बनेगा मंदिर

ट्रस्ट के अध्यक्ष एस.के. बेहरा ने बताया कि प्रस्तावित मंदिर परिसर लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से ढाई एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा।

परियोजना की रूपरेखा

प्रस्तावित मंदिर परियोजना के तहत मुख्य मंदिर परिसर लगभग 1.5 एकड़ भूमि में विकसित किया जाएगा, जबकि इसके साथ स्थापित होने वाला आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र 1 एकड़ क्षेत्र में निर्मित होगा। मंदिर के निर्माण की अनुमानित अवधि चार वर्ष निर्धारित की गई है, वहीं आध्यात्मिक केंद्र को दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

मंदिर की संरचना को पुरी के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को पारंपरिक स्थापत्य और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव मिल सके। वहीं प्रस्तावित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित रहेगा। यहां गीता, भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से नैतिक शिक्षा, अनुशासन, आत्मबल और जीवन मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

ट्रस्ट के अनुसार, इस केंद्र में 200 से 250 किलोमीटर के दायरे में स्थित शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक प्रशिक्षण के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास कर सकें।

मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज में कार्यक्रम

राष्ट्रपति ने अपने दौरे के दौरान बारीडीह स्थित मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज में भी एक कार्यक्रम में भाग लिया।उन्होंने एक भवन का शिलान्यास किया और छात्रों से संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन और सेवा भावना के महत्व पर प्रेरित किया।

सादगी की मिसाल: 150 कदम पैदल चलकर जीता दिल

राष्ट्रपति के दौरे का सबसे भावुक और यादगार क्षण बारीडीह क्षेत्र में देखने को मिला। जब वह कॉलेज कार्यक्रम से लौट रही थीं, तो सड़क किनारे बड़ी संख्या में लोग उनकी एक झलक पाने के लिए खड़े दिखाई दिए। यह दृश्य देखकर राष्ट्रपति ने अपना काफिला रुकवाने का निर्णय लिया।

सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के बावजूद वह गाड़ी से उतरीं और करीब 150 कदम पैदल चलकर लोगों के बीच पहुंचीं। उन्होंने बच्चों को चॉकलेट बांटी, उनसे बातचीत की और आत्मीयता से उनका हालचाल पूछा। इस दौरान माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। एक बच्ची आयशा ने उत्साहित होकर कहा, “मैंने सोचा नहीं था कि टीवी वाली दादी मुझे टॉफी देंगी।” वहीं स्थानीय निवासी परविंदर कौर ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।

राष्ट्रपति की इस सादगी और आत्मीय व्यवहार से पूरा इलाका भावुक हो उठा और “द्रौपदी मुर्मू जिंदाबाद” के नारों से वातावरण गूंजता रहा।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक और बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी। निर्धारित रूट पर ट्रैफिक डायवर्जन किया गया, ताकि आवागमन सुचारु रहे और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। आम नागरिकों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था भी की गई थी। संवेदनशील स्थलों पर बैरिकेडिंग और नो-एंट्री जोन बनाए गए, जबकि पूरे रूट और कार्यक्रम स्थलों पर पुलिस व अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। प्रशासन के अनुसार सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुए।

जमशेदपुर से विशेष जुड़ाव

यह पहला अवसर नहीं है जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जमशेदपुर में सादगी की मिसाल पेश की हो। 2023 में एनआईटी जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान भी उन्होंने आम लोगों के बीच पहुंचकर सबका दिल जीत लिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारीडीह का यह दिन इतिहास में दर्ज रहेगा, जब देश की प्रथम नागरिक आम लोगों के बीच पैदल चलीं और बच्चों के साथ सहजता से संवाद किया।

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