गैर-दंडात्मक तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई; चुनावी सुधारों के लिए व्यापक नीति-निर्माण का संकेत
Highlights
- सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मतदान पर तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई
- गैर-दंडात्मक (Non-Punitive) व्यवस्था पर जोर
- NOTA के सीमित उपयोग पर अदालत की चिंता
- एकल उम्मीदवार वाले क्षेत्रों में NOTA को उम्मीदवार मानने की मांग पर सुनवाई
- संसद को कानून में संशोधन का अधिकार बताया

विस्तार
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र को और मजबूत बनाने के लिए मतदान को अनिवार्य बनाने की दिशा में किसी प्रभावी तंत्र पर विचार करने की जरूरत पर जोर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसा गैर-दंडात्मक (Non-Punitive) तंत्र विकसित किया जा सकता है, जिससे अधिक से अधिक लोग मतदान प्रक्रिया में भाग लें, बेहतर उम्मीदवार चुनाव मैदान में आएं और समय के साथ NOTA (None of the Above) का विकल्प अप्रासंगिक हो जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
NOTA के सीमित इस्तेमाल पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NOTA विकल्प इसलिए लाया गया था ताकि मतदाताओं को असहमति दर्ज करने का अधिकार मिले और राजनीतिक दल बेहतर उम्मीदवार उतारने के लिए प्रेरित हों। हालांकि, अदालत ने एक दशक के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि बहुत कम प्रतिशत मतदाता NOTA का उपयोग कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि चुनावी सुधारों की दिशा में और गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है।
किस याचिका पर हुई सुनवाई?
अदालत विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई थी कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में केवल एक ही उम्मीदवार चुनाव मैदान में हो, वहां NOTA को एक उम्मीदवार के रूप में माना जाए। इससे यह आंका जा सके कि मतदाता उस अकेले उम्मीदवार को स्वीकार करते हैं या नहीं।
कानून में संशोधन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NOTA को उम्मीदवार का दर्जा देने के लिए संसद को Representation of the People Act में संशोधन करना होगा। अदालत ने संकेत दिया कि चुनावी सुधार केवल न्यायिक आदेश से नहीं, बल्कि व्यापक विधायी और नीतिगत पहल से संभव होंगे।
अनिवार्य मतदान पर क्या संकेत?
पीठ ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सहभागिता बढ़ाना आवश्यक है। हालांकि अदालत ने दंडात्मक व्यवस्था का समर्थन नहीं किया, लेकिन गैर-दंडात्मक तंत्र विकसित करने की संभावना पर जोर दिया—जैसे जागरूकता अभियान, प्रोत्साहन आधारित मॉडल या प्रशासनिक सुधार।
लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को चुनावी सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मतदाता सहभागिता बढ़ती है और राजनीतिक दल बेहतर उम्मीदवार उतारते हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक जवाबदेह और सशक्त बन सकती है।
